टिपण्णी

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: जब-जब अधर्म का अंधेरा आए, सावधानी से धर्म पर काम करें

धर्म कभी नष्ट नहीं होता, वह केवल लुप्त होता है। और अधर्म भी नष्ट नहीं होता, थोड़े समय के लिए अनुपस्थित हो जाता है। यदि अधर्म नष्ट हो जाता हमेशा के लिए, तो महाभारत के बाद कलियुग में फिर वही सब न होता। लेकिन कृष्ण भी जानते थे कि ना धर्म नष्ट होगा, ना अधर्म। […]