टिपण्णी

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: हमारे युवा अंगद व अभिमन्यु की तरह निर्भय हों और संस्कारी रहें

अनादिकाल से संसार युवाओं में भविष्य देखता रहा है। संसारभर के युवा एक जैसे ही हैं। लेकिन भारत की युवा-अवस्था कुछ विशेष हो जाती है। क्योंकि, यहां संस्कार की सम्भावना अभी बनी हुई है। शिक्षा तो सारे संसार में पसर रही है। लेकिन शिक्षा के साथ संस्कार का आग्रह भारत के रज-रज और कण-कण में […]