प्रो. चेतन सिंह सोलंकी का कॉलम:  समृद्धि का अमृत तो मिला पर प्रदूषण का विष कौन पीएगा?
टिपण्णी

प्रो. चेतन सिंह सोलंकी का कॉलम: समृद्धि का अमृत तो मिला पर प्रदूषण का विष कौन पीएगा?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब देवों और असुरों ने अमृत की प्राप्ति के लिए समुद्र-मंथन किया था तो अमृत से पहले हलाहल नामक भीषण विष निकला था। उस विष से समस्त सृष्टि के विनाश का संकट खड़ा हो गया था। तब भगवान शिव ने करुणावश उसे अपने कंठ में धारण किया और नीलकंठ कहलाए। आज […]