एन. रघुरामन का कॉलम:  बच्चों को किताबों की ओर आकर्षित करने के लिए नए-नए आइडिया की जरूरत है
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एन. रघुरामन का कॉलम: बच्चों को किताबों की ओर आकर्षित करने के लिए नए-नए आइडिया की जरूरत है

इस देश के पास 1.99 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 188 लाख करोड़ रुपए) का सॉवरेन वेल्थ फंड है, जो दुनिया के सबसे बड़े ऐसे फंड्स में से एक है। यहां गत वर्ष बिकने वाली कारों में से 96% इलेक्ट्रिक थीं। लेकिन इसकी 56 लाख की आबादी में करीब 5 लाख लोग एक टेक्स्ट मैसेज या सामान्य […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  अधिकतर परिवारों के लिए फोन बेबीसिटर बन गए हैं
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एन. रघुरामन का कॉलम: अधिकतर परिवारों के लिए फोन बेबीसिटर बन गए हैं

अगर आप ग्रामीण भारत में किसी पैसेंजर ट्रेन में सफर कर रहे हैं तो आपको कुछ ऐसा दृश्य दिख सकता है- चलती ट्रेन में भी किचन की जिम्मेदारी संभाल रही एक युवा मां अपने हैंडबैग में हाथ डालती है। उसका साल भर का बेटा राहुल (काल्पनिक नाम) बेचैन है। उसके नन्हे-से हाथ मां की कलाई […]

डॉ. चन्द्रकान्त लहारिया का कॉलम:  अपने बच्चों को सुरक्षा जरूर दें लेकिन चुनौतियों से डरें नहीं
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डॉ. चन्द्रकान्त लहारिया का कॉलम: अपने बच्चों को सुरक्षा जरूर दें लेकिन चुनौतियों से डरें नहीं

हाल के दिनों में जापान से ‘पंच’ नामक एक बंदर के वीडियो लगातार वायरल हुए हैं। यह 7 महीने का मकाक बंदर है, जिसे एक चिड़ियाघर में रखा गया है। उसकी मां ने उसे त्याग दिया था और अन्य बंदर उसे तंग कर रहे थे। उसको दु:खी देखकर चिड़ियाघर संचालक ने उसे एक सॉफ्ट टॉय […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  ‘एफडीपी’ अपनाने से बच्चों की सफलता पक्की है
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एन. रघुरामन का कॉलम: ‘एफडीपी’ अपनाने से बच्चों की सफलता पक्की है

परीक्षाएं हों या गर्मियों की छुट्टियां, स्कूल के दिन हों या वीकेंड, चाहे बाहर बारिश हो रही हो या अचानक बिजली चली जाए, लेकिन शाम 7.30 बजे हमारा डिनर टाइम तय था। हम उस फैमिली गैदरिंग में न आने का कोई बहाना नहीं बना सकते थे। नियम सिर्फ दो मौकों पर टूटता था- जब किसी […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  ‘एफडीपी’ अपनाने से बच्चों की सफलता पक्की है
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एन. रघुरामन का कॉलम: ‘एफडीपी’ अपनाने से बच्चों की सफलता पक्की है

परीक्षाएं हों या गर्मियों की छुट्टियां, स्कूल के दिन हों या वीकेंड, चाहे बाहर बारिश हो रही हो या अचानक बिजली चली जाए, लेकिन शाम 7.30 बजे हमारा डिनर टाइम तय था। हम उस फैमिली गैदरिंग में न आने का कोई बहाना नहीं बना सकते थे। नियम सिर्फ दो मौकों पर टूटता था- जब किसी […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  माता-पिता बच्चों के निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाएं
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: माता-पिता बच्चों के निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाएं

इन दिनों अपने बच्चों के लालन-पालन में कुछ अधिक ही अलर्ट माता-पिता उनसे अत्यधिक पूछताछ करते हैं और टोका-टाकी करते रहते हैं। इस चक्कर में वो भूल जाते हैं कि बच्चों के मनोविज्ञान पर विपरीत असर पड़ रहा है। कुछ माता-पिता तो भोजन के समय भी बच्चों को इतने अधिक विकल्प दे देते हैं कि […]

डॉ. चन्द्रकान्त लहारिया का कॉलम:  जीवन के पहले 1000 दिनों पर रहता है भविष्य का दारोमदार
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डॉ. चन्द्रकान्त लहारिया का कॉलम: जीवन के पहले 1000 दिनों पर रहता है भविष्य का दारोमदार

8 घंटे पहले कॉपी लिंक डॉ. चन्द्रकान्त लहारिया, जाने माने चिकित्सक विकसित भारत के बड़े सपने की नींव में एक गंभीर कमी है : बच्चे के जन्म से पहले और बचपन में देखभाल और विकास पर नाकाफी ध्यान। गर्भधारण से लेकर बच्चे के दूसरे जन्मदिन तक का समय यानी जीवन के पहले 1,000 दिनों को […]

पेरेंटिंग- 5 साल का बेटा बहुत सवाल पूछता है:  जवाब देते-देते थक जाती हूं, सवाल पूछना तो ठीक पर जवाब देने की एनर्जी कहां से लाऊं
महिला

पेरेंटिंग- 5 साल का बेटा बहुत सवाल पूछता है: जवाब देते-देते थक जाती हूं, सवाल पूछना तो ठीक पर जवाब देने की एनर्जी कहां से लाऊं

14 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक सवाल- मैं लखनऊ से हूं। मेरा 5 साल का बेटा बहुत सवाल पूछता है। दिनभर किसी न किसी चीज को लेकर उत्सुक रहता है। जैसेकि ‘आसमान नीला क्यों है?‘, ‘चींटियां लाइन में क्यों चलती हैं?‘, ‘पापा ऑफिस क्यों जाते हैं?‘। शुरू में मुझे उसकी जिज्ञासा प्यारी लगती थी, […]