एन. रघुरामन का कॉलम:  जब प्रतिस्पर्धी आपको हरा दे तो उससे हाथ मिलाना ‘अक्लमंदी’ है
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एन. रघुरामन का कॉलम: जब प्रतिस्पर्धी आपको हरा दे तो उससे हाथ मिलाना ‘अक्लमंदी’ है

‘सर, मेरे पास एयरपोर्ट परिसर की कुछ दुकानें लीज पर हैं। एयरपोर्ट के इस अत्याधुनिक ट्रैवलर्स सीटिंग एरिया में लेदर प्रोडक्ट्स का एक भी एग्जीबिटर नहीं है। क्या आप मुझे अपने किसी लेदर मैन्युफैक्चरर दोस्त से मिलवा सकते हैं, ताकि मैं उनसे हाथ मिलाकर एयरपोर्ट पर ऐसा आउटलेट शुरू कर सकूं?’ मित्र सुधांशु की फोन […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  बातचीत, सहयोग व एकांत से खत्म होता है अकेलापन
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: बातचीत, सहयोग व एकांत से खत्म होता है अकेलापन

Hindi News Opinion Loneliness Ends With Talk, Collaboration & Solitude | Vijay Shankar Mehta Column 4 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता एक छत के नीचे कई सदस्य रहते हों तो भी उनमें से कुछ को लगता है कि हम अकेले हैं। घर के बाहर की दुनिया में लोकप्रियता हो, प्रतिष्ठा रहे, उसके बाद […]