पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  बातचीत, सहयोग व एकांत से खत्म होता है अकेलापन
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: बातचीत, सहयोग व एकांत से खत्म होता है अकेलापन

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4 घंटे पहले

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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar

पं. विजयशंकर मेहता

एक छत के नीचे कई सदस्य रहते हों तो भी उनमें से कुछ को लगता है कि हम अकेले हैं। घर के बाहर की दुनिया में लोकप्रियता हो, प्रतिष्ठा रहे, उसके बाद भी कुछ लोगों को लगता है हम अकेले हैं। जो लोग भीड़ से घिरे रहते हैं, उनको भी अकेलापन काटता है। तो समझ लें कि अकेलापन हालात नहीं, बीमारी है। और अकेलापन लंबे समय टिक जाए तो अवसाद आने में देर नहीं लगेगी।

इसलिए अकेलेपन का इलाज तुरंत ही कर लेना चाहिए। तो सबसे पहले यह समझें कि अकेलापन एक एहसास है। जितना महसूस करेंगे, यह उतना बढ़ता जाएगा। और यह भी तय है कि यह एहसास खत्म नहीं होगा। इस अनुभूति का मुंह मोड़ना पड़ेगा। तो पहला काम यह करिए कि दूसरों से दिल खोलकर बातें करिए।

इससे हम हल्के हो जाते हैं, क्योंकि भीतर का भारीपन अकेलेपन का समर्थन करता है। दूसरा, लोगों की खूब सहायता कीजिए। सहयोग की वृत्ति अकेलेपन में आनंद भर देती है। और तीसरा काम करें कि अकेलेपन को एकांत से जोड़ें। अकेलापन हम दूसरों से भरकर मिटाते हैं, एकांत में हम परमात्मा से जुड़ जाते हैं।

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