‘अच्छा चलता हूं दुआओं में याद रखना, मेरे जिक्र का जुबां पे स्वाद रखना, दिल के संदूकों में मेरे अच्छे काम रखना, चिट्ठी तारों में भी मेरा तू सलाम रखना…।’ यह महज 38 वर्षीय गायक अरिजीत सिंह का गाना नहीं है, बल्कि कार्यस्थलों पर युवाओं की जीवनशैली भी बन रहा है। अरिजीत ने पार्श्वगायन से […]
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एन. रघुरामन का कॉलम: क्यों कुछ युवा बहुत जल्दी कामकाज को अलविदा कह रहे हैं
‘अच्छा चलता हूं दुआओं में याद रखना, मेरे जिक्र का जुबां पे स्वाद रखना, दिल के संदूकों में मेरे अच्छे काम रखना, चिट्ठी तारों में भी मेरा तू सलाम रखना…।’ यह महज 38 वर्षीय गायक अरिजीत सिंह का गाना नहीं है, बल्कि कार्यस्थलों पर युवाओं की जीवनशैली भी बन रहा है। अरिजीत ने पार्श्वगायन से […]





