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‘अच्छा चलता हूं दुआओं में याद रखना, मेरे जिक्र का जुबां पे स्वाद रखना, दिल के संदूकों में मेरे अच्छे काम रखना, चिट्ठी तारों में भी मेरा तू सलाम रखना…।’ यह महज 38 वर्षीय गायक अरिजीत सिंह का गाना नहीं है, बल्कि कार्यस्थलों पर युवाओं की जीवनशैली भी बन रहा है। अरिजीत ने पार्श्वगायन से रिटायरमेंट की घोषणा कर पूरी इंडस्ट्री को चौंका दिया। उन्होंने कहा वे फिल्मों के लिए गायकी के तकनीकी दोहरावों से ऊब चुके हैं और अब स्वतंत्र संगीत तथा रचनात्मक विकास पर ध्यान देना चाहते हैं। इसे लोग निजी निर्णय बता सकते हैं, तो दूसरी ओर कुछ लोग अपने को हील करने के लिए लंबा ब्रेक ले रहे हैं। ‘क्विटिंग’ का यह चलन 2024 से लोकप्रिय हुआ। कुछ नाम यहां पेश हैं। 1. कॉमेडियन जाकिर खान (38) ने हाल ही में जेनेटिक स्वास्थ्य समस्या और थकान का हवाला देते हुए लाइव परफॉर्मेंस से लंबे ब्रेक की घोषणा की। यह ब्रेक 2030 तक चल सकता है।
2. ‘द लॉस्ट’ और ‘एंट मैन’ की एक्ट्रेस एवांजेलिन लिली (44) ने परिवार, मानवीय कार्यों और लेखन के लिए अनिश्चित समय तक अभिनय से दूर रहने का ऐलान किया।
3. ‘वैम्पायर डायरीज’ के स्टार इयान सोमरहेल्डर (47) ने री-जनेरेटिव फार्मिंग और परिवार के लिए हॉलीवुड छोड़ दिया। उनका कहना है कि वे इंडस्ट्री की चकाचौंध से ज्यादा शांत जीवन पसंद करते हैं।
4. टॉप मॉडल बेला हदीद (29) ने फैशन इंडस्ट्री छोड़ते हुए कहा कि हाई-प्रेशर वाले माहौल में उन्हें संतोष नहीं मिलता।
5. जस्टिन बीबर और एरियाना ग्रांडे के हाई-प्रोफाइल म्यूजिक मैनेजर रहे स्कूटर ब्रॉन (44) ने भी 2024 में आर्टिस्ट मैनेजमेंट से रिटायरमेंट ले लिया, ताकि एक पिता और एक एग्जीक्यूटिव के दायित्वों पर ध्यान दे सकें। मुझे याद है कि ‘क्विटिंग’ शब्द युवाओं में नवंबर 2018 में तब चलन में आया, जब यूट्यूब स्टार लिली सिंह (तब वो 30 साल की थीं और अब 37 साल की हैं) ने अपने मुख्य चैनल ‘सुपरवुमन’ से अस्थायी ब्रेक लेने की बहुचर्चित घोषणा की। उन्होंने मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक थकान को कारण बताया। फिर, 2019 में मशहूर इंग्लिश कॉमेडियन फिल जुपिटस ने 63 की उम्र में स्कॉटलैंड की डुंडी यूनिवर्सिटी में अध्ययन का फैसला किया। लेकिन सवाल यह है कि इतने युवा कामकाज की सबसे अहम उम्र में ‘क्विट’ क्यों कर रहे हैं? इसके पीछे जॉबलैस रहने की इच्छा नहीं, बल्कि यह उनकी प्राथमिकताओं में गहरे बदलाव से प्रेरित है। 2025-2026 में कई सारे कामकाजी युवा टॉक्सिक, कठोर और ठहराव भरे माहौल से बचने के लिए स्वेच्छा से काम छोड़ रहे हैं। इसके प्रमुख कारण यहां बता रहा हूं। 1. बर्नआउट और मानसिक स्वास्थ्य : ‘क्विटिंग’ को करियर की विफलता से ज्यादा आत्मसंरक्षण के तौर पर देखा जाने लगा है। कर्मचारी बर्नआउट से बचने के लिए काम छोड़ रहे हैं। वे अपनी बेहतरी के लिए स्टैंड ले रहे हैं।
2. टॉक्सिक माहौल व लचर प्रबंधन : यहीं से ‘रिवेंज क्विटिंग’ का विचार जन्म लेता है। विषैले वातावरण के विरोध में कई लोग काम छोड़ देते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार 47% कर्मचारियों ने निराशा जताने के लिए नौकरी छोड़ी।
3. लचीलेपन और रिमोट वर्क की कमी : महामारी ने साबित किया है कि उत्पादकता दफ्तर में मौजूद रहने पर निर्भर नहीं है। जबरन ऑफिस बुलाने की नीतियां इस्तीफों की बड़ी वजह हैं। वर्क-लाइफ बैलेंस की अहमियत बढ़ी है।
4. करियर में ठहराव और ग्रोथ की कमी : कई युवा पेशेवर ऐसी ‘डेड-एंड’ नौकरियों के चलते काम छोड़ रहे हैं, जिनमें ग्रोथ का वादा तो किया जाता है, लेकिन होता कुछ नहीं। वे ठहराव-सा महसूस करते हैं। कम से कम 57% लोग ग्रोथ में ठहराव महसूस करने के बाद नई स्किल्स सीखने को तैयार हैं।
5. मकसद और मूल्यों की तलाश : अगर कोई नौकरी नीरस या बिना किसी बड़े सामाजिक प्रभाव की लगे तो युवा उससे दूरी बना लेते हैं। फंडा यह है कि युवा पारंपरिक व शोषण करने वाले कामकाजी माहौल से ज्यादा मानसिक स्वास्थ्य और लॉन्ग टर्म करियर ग्रोथ को प्राथमिकता देने लगे हैं तो आंत्रप्रेन्योर्स को भी ऐसे वर्कप्लेस बरकरार रखने पर ध्यान देना होगा।
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