टिपण्णी

एन. रघुरामन का कॉलम: दीया भारतीय संस्कृति की अहमियत बरकरार रखे हुए है

मेरी यादों में एक तस्वीर कभी धुंधली नहीं पड़ी। मेरी मां एक-एक करके वॉक-वे के किनारे दीये सजा रही थीं। रंगोली के बीच में एक बड़ा दीया रखा था। धीरे-धीरे ढलता सूरज अंधेरे को राह दे रहा था। सांझ होते ही मां ने दीये जलाने शुरू किए। मां के चेहरे के एक हिस्से पर हल्की […]