टिपण्णी

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: शांति पानी हो तो 24 घंटे में दो- तीन बार विचार-शून्य हो जाएं

इन दिनों राष्ट्राध्यक्षों को एक मंच पर देखकर, उनके बयानों को सुनकर सामान्य व्यक्ति को लगता है कि क्या हम और हमारा देश सुरक्षित है? कुछ ऊंचे कद के लोगों के तो बयान भी किसी हथियार के वार से कम नहीं होते। आमजन के मन में बेचैनी आना स्वाभाविक है। दैनिक वस्तुएं महंगी हो गई […]