21 घंटे पहलेलेखक: गौरव तिवारी कॉपी लिंक दिन और रात का बदलना हो या सूरज का एक तय गति से हर दिन उगना-डूबना। पृथ्वी का अपनी धुरी पर घूमना हो या ऋतुओं का आना-जाना… पूरी प्रकृति एक अदृश्य अनुशासन से बंधी हुई है। अगर ये अनुशासन जरा भी डगमगाए, तो पूरी दुनिया अस्त-व्यस्त होने लगेगी। […]





