किसी पर कलंक लगाना आजकल व्यापार-सा हो गया है। जब किसी के चरित्र पर लांछन लगाया जाता है, तो उसका सत्य ढूंढना बड़ा कठिन होता है। क्योंकि सत्य जिस न्याय की अपेक्षा करता है, वो न्याय भी अपने गलियारों में किसी और से न्याय मांग रहा होता है। दुनिया में जितने काम आसान हैं, उनमें […]
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: ईश्वर से मिलने के लिए कुछ समय भीतर जाना ही पड़ेगा
जो हर जगह गूंज रहा है, उस दिव्य शक्ति, परमात्मा को समेटना ही भजन बन जाता है। भजन का सच्चा अर्थ यही है कि इसको करने वाला और सुनने वाला ध्वनि बन जाता है, मनुष्य नहीं रह जाता। जब ऐसा होता है तभी भजन का असली आनंद है। सच्चे भजन के लिए किसी ऑर्केस्ट्रा की […]






