सबरीमाला केस, सुप्रीम कोर्ट बोला बार-बार रुख नहीं बदल सकते:  बोहरा समाज में बहिष्कार और धार्मिक अधिकारों पर 1986 की PIL की वैधता पर सवाल उठाए
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सबरीमाला केस, सुप्रीम कोर्ट बोला बार-बार रुख नहीं बदल सकते: बोहरा समाज में बहिष्कार और धार्मिक अधिकारों पर 1986 की PIL की वैधता पर सवाल उठाए

Hindi News National SC: Religion Choice Right From Birth, Not By Marriage; Says Exclusion Discriminatory नई दिल्ली9 मिनट पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सबरीमाला मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने 40 साल पुरानी जनहित याचिका ( PIL) की वैधता पर सवाल उठाए। यह याचिका दाऊदी बोहरा समुदाय में बहिष्कार (एक्सकम्युनिकेशन) के अधिकार […]

सबरीमाला केस, सुप्रीम कोर्ट बोला बार-बार रुख नहीं बदल सकते:  बोहरा समाज में बहिष्कार और धार्मिक अधिकारों पर 1986 की PIL की वैधता पर सवाल उठाए
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Hindi News National SC: Religion Choice Right From Birth, Not By Marriage; Says Exclusion Discriminatory नई दिल्ली2 घंटे पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सबरीमाला मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने 40 साल पुरानी जनहित याचिका ( PIL) की वैधता पर सवाल उठाए। यह याचिका दाऊदी बोहरा समुदाय में बहिष्कार (एक्सकम्युनिकेशन) के अधिकार […]

जनसत्ता सरोकार: घर की दीवारों के भीतर कैद चुप्पी, कब टूटेगा घरेलू हिंसा का सन्नाटा?
जीवन शैली/फैशन लाइफस्टाइल

जनसत्ता सरोकार: घर की दीवारों के भीतर कैद चुप्पी, कब टूटेगा घरेलू हिंसा का सन्नाटा?

महिलाओं के लिए उनका घर-आंगन सबसे सुरक्षित स्थान होना चाहिए। परिवार और परिवेश में अपनों का संबल मिलना चाहिए। मान-सम्मान की रक्षा होनी चाहिए। दुखद है कि भारत ही नहीं, कमोबेश हर देश में घरेलू हिंसा का दंश महिलाओं के हिस्से है। मन और मान को ठेस पहुंचाने वाले इस बर्ताव के रंग-ढंग भले अलग […]

दुनिया मेरे आगे: पितृसत्ता के साये में स्त्री का वजूद, क्या कोख से आगे कुछ नहीं, कब टूटेंगे बेड़ियों के ये बंधन? – Dunia Mere Aage: Existence of women in the shadow of patriarchy, is there nothing beyond the womb, when will these shackles be broken?
खेलकूद क्रिकेट

दुनिया मेरे आगे: पितृसत्ता के साये में स्त्री का वजूद, क्या कोख से आगे कुछ नहीं, कब टूटेंगे बेड़ियों के ये बंधन? – Dunia Mere Aage: Existence of women in the shadow of patriarchy, is there nothing beyond the womb, when will these shackles be broken?

दुनिया मेरे आगे: पितृसत्ता के साये में स्त्री का वजूद, क्या कोख से आगे कुछ नहीं, कब टूटेंगे बेड़ियों के ये बंधन? – Dunia Mere Aage: Existence of women in the shadow of patriarchy, is there nothing beyond the womb, when will these shackles be broken? | Jansatta Source link