टिपण्णी

सैयद अता हसनैन का कॉलम: हम ‘एनर्जी-डिप्लोमेसी’ के एक नए दौर में हैं

एनर्जी का वैश्विक भूगोल बदल रहा है और उसके साथ ही औद्योगिक क्षमता तथा राष्ट्रीय शक्ति के बीच गहराते संबंध भी। दशकों तक हमने एनर्जी की राजनीति में खुद को कमजोर उपभोक्ता के रूप में देखा था। हमारी बढ़ती अर्थव्यवस्था को आयातित कच्चे तेल की जरूरत थी, लेकिन पश्चिम एशिया में होने वाले संघर्ष तेल […]