एन. रघुरामन का कॉलम:  नेकी लौटती है, हम तक नहीं तो हमारे बच्चों तक पहुंचती है
टिपण्णी

एन. रघुरामन का कॉलम: नेकी लौटती है, हम तक नहीं तो हमारे बच्चों तक पहुंचती है

कुछ तारीखें अविस्मरणीय बन जाती हैं, इसलिए नहीं कि उस दिन कुछ खास घटित हुआ था बल्कि इसलिए कि वे समाज में नेकी का एहसास कराती हैं। 20 जुलाई ऐसी ही एक तारीख है। आप यह पढ़कर जो घटनाक्रम याद कर रहे हैं, उस पर मैं बाद में आऊंगा। लेकिन उससे पहले मैं आपको आईआईटी […]