एन. रघुरामन का कॉलम:  ‘सही करने’ से ज्यादा अहम ‘आगे निकलना’ हो जाए तो सामाजिक मूल्य खत्म होते हैं
टिपण्णी

एन. रघुरामन का कॉलम: ‘सही करने’ से ज्यादा अहम ‘आगे निकलना’ हो जाए तो सामाजिक मूल्य खत्म होते हैं

किसी भी समाज की ताकत अकसर उसके संस्थानों की ईमानदारी से मापी जाती है- जैसे स्कूल, जो हमारे युवाओं को गढ़ते हैं या पुलिसकर्मी, जो हमारे मोहल्लों की सुरक्षा करते हैं। लेकिन, इस हफ्ते देश के विभिन्न हिस्सों में हुई तीन घटनाओं ने इस बुनियाद में आती चिंताजनक दरार को दिखाया। जौनपुर और गोवा में […]