टिपण्णी

एन. रघुरामन का कॉलम: आजीविका जीवन बनाए रखने वाली हो, जीवन को खतरे में डालने वाली नहीं

पिछले शुक्रवार की शाम पुणे के पिंपरी सौदागर निवासी 43 वर्षीय चार्टर्ड अकाउंटेंट मनोज मालपानी ने खुद को एक असामान्य और संभावित तौर पर खतरनाक स्थिति में पाया। वे मुंबई एयरपोर्ट से पुणे तक एक कैब में जा रहे थे। उन्होंने देखा कि ड्राइवर बार-बार जम्हाई ले रहा था और जागे रहने के लिए संघर्ष […]