पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  विवाह में देह से आगे बढ़कर आत्मा तक की यात्रा करें
टिपण्णी

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: विवाह में देह से आगे बढ़कर आत्मा तक की यात्रा करें

विवाह इसीलिए रचाया जाता है कि जीवन में एक अभाव की पूर्ति हो जाए। विवाह पूर्व जिस सुख की तलाश में मनुष्य रहता है, वो प्राप्त हो जाए। दु:ख की कल्पना कोई नहीं करता। लेकिन इन दिनों विवाह के मतलब बदलते जा रहे हैं। एक पीढ़ी तो भूल ही जाएगी कि विवाह संस्कार है। और […]