पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  ‘मनचाहा’ और ‘अनचाहा’ के बीच झूलता रहता है जीवन
टिपण्णी

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: ‘मनचाहा’ और ‘अनचाहा’ के बीच झूलता रहता है जीवन

धन मेहनत से आता है, लेकिन समृद्धि अपने साथ दूसरों को धनवान बनाने से भी आती है। जब हम विकास यात्रा में हों तो किसी को पीछे भले छोड़ दें, उसको बर्बाद ना करें। अपने प्रयासों से आगे बढ़ जाएं। जो पीछे रह गया, यदि वो नादान है तो खुद बर्बाद हो जाएगा, लेकिन हमारी […]

रसरंग में चिंतन:  मौन के गुंबद पर लहराता है आनंद का ध्वज
अअनुबंधित

रसरंग में चिंतन: मौन के गुंबद पर लहराता है आनंद का ध्वज

घर के सामने एक घना वृक्ष है। कई लोगों से इस वृक्ष के बारे में पूछा, पर कोई भी उसके बारे में विस्तार से बता नहीं पाया। उसका नाम भी किसी ने नहीं बताया, तो मैंने ही उसका नाम रख दिया – “सत्यकाम’। बिना नाम और लेबल के कोई वस्तु हर तरह से पूर्ण हो, […]