पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  श्रोता बनने की बारी आए तो अच्छे श्रोता बनिए
टिपण्णी

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: श्रोता बनने की बारी आए तो अच्छे श्रोता बनिए

अच्छा सुनने के लिए अच्छा होना ही पड़ेगा। पक्षीराज गरुड़ ने जब काकभुशुंडि जी से निवेदन किया कि कथा सुनाइए तो तुलसीदास जी ने गरुड़ जी की वाणी का वर्णन किया है- सुनत गरुड़ कै गिरा बिनीता, सरल सुप्रेम सुखद सुपुनीता। गरुड़ जी की विनम्र, सरल, सुंदर, प्रेम युक्त, सुखप्रद और अत्यंत पवित्र वाणी सुनते […]