ज्यां द्रेज का कॉलम:  जीने के हमारे पुराने तरीके कहीं गुम होते जा रहे हैं…
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ज्यां द्रेज का कॉलम: जीने के हमारे पुराने तरीके कहीं गुम होते जा रहे हैं…

पुराने दिनों में रांची एक सुंदर शहर हुआ करता था। तब यह आज के जैसा बड़ा शहर नहीं, बल्कि एक छोटा-सा कस्बा था, जिसके चारों ओर कई आदिवासी बस्तियां थीं। बीच में बहुत सारे तालाब, नदियां और बगीचे थे। फिर धीरे-धीरे इन बस्तियों की जगह बड़े मकान, मॉल और फ्लाईओवर बन गए। अब सिर्फ उनके […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  कनेक्शन और सेलिब्रेशन अपने पुराने तौर-तरीकों पर लौट रहे हैं
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एन. रघुरामन का कॉलम: कनेक्शन और सेलिब्रेशन अपने पुराने तौर-तरीकों पर लौट रहे हैं

बचपन में हममें से ज्यादातर लोग पैरेंट्स के साथ ‘सत्संग’ में जाते थे। उनके बगल में बैठते थे। भले ही शायद हम न जानते हों कि भजनों के बोल क्या हैं और कैसे इन्हें गाया जाता है। कुछ लोगों ने शायद वो ऊर्जा तरंगें महसूस की होंगी और कुछ ने उन्हें अनदेखा किया होगा। हममें […]