हरिद्वार3 घंटे पहले कॉपी लिंक समय ठीक वैसे ही है जैसे उबलता जल — जो एक बार वाष्प बनकर उड़ जाता है, तो फिर कभी उसी पात्र में लौटकर नहीं आता। हर क्षण, हर पल समय हमारे हाथों से निकलता जा रहा है। यह अचानक नहीं जाता, बल्कि धीरे-धीरे, श्नै:श्नै:, चुपचाप दूर होता रहता है। […]





