अर्घ्य सेनगुप्ता और स्वप्निल त्रिपाठी का कॉलम:  राजनीतिक दलों और नेताओं के रिश्तों में खींचतान का दौर
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अर्घ्य सेनगुप्ता और स्वप्निल त्रिपाठी का कॉलम: राजनीतिक दलों और नेताओं के रिश्तों में खींचतान का दौर

Hindi News Opinion Political Parties & Leaders Rift: Arghya Sengupta & Swapnil Tripathi Column 8 घंटे पहले कॉपी लिंक अर्घ्य सेनगुप्ता और स्वप्निल त्रिपाठी विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी में पदाधिकारी बीते कुछ समय में शिवसेना के 6, तृणमूल के 20 और आप के 7 लोकसभा-राज्यसभा सांसद दूसरी पार्टियों में शामिल हुए हैं। तीनों ही […]

शेखर गुप्ता का कॉलम:  पाक को छोड़ पड़ोस में लोकतंत्र परिपक्व
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शेखर गुप्ता का कॉलम: पाक को छोड़ पड़ोस में लोकतंत्र परिपक्व

चाहे हम कितनी भी कोशिश कर लें, हमें पूरी दुनिया में कहीं भी एक-दूसरे से जुड़ा ऐसा क्षेत्र नहीं मिल सकता, जहां 2 अरब लोग चुनाव में मतदान करते हों और लोकतंत्र को महत्व देते हों। ऐसा क्षेत्र न अमेरिकी महादेश में मिलेगा, न अफ्रीकी महादेश में। यूरोप की आबादी इतनी बड़ी नहीं है और […]

शेखर गुप्ता का कॉलम:  हमें एक बांग्ला-भाषी ‘पाकिस्तान’ नहीं चाहिए
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शेखर गुप्ता का कॉलम: हमें एक बांग्ला-भाषी ‘पाकिस्तान’ नहीं चाहिए

इस हफ्ते के अंत या अगले हफ्ते की शुरुआत तक बांग्लादेश में एक चुनी हुई सरकार सत्ता संभाल सकती है। अवामी लीग को चुनाव में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी गई है, इसलिए विश्वसनीयता पर सवाल बने रहेंगे। फिर भी लोकतंत्र के पैमाने पर इसे कुछ हद तक निष्पक्ष चुनाव कहा जा सकता है, […]

आशुतोष वार्ष्णेय का कॉलम:  तेजी से बदल रहे हैं दुनिया के समीकरण
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आशुतोष वार्ष्णेय का कॉलम: तेजी से बदल रहे हैं दुनिया के समीकरण

1958 से 1998 के बीच वेनेजुएला लैटिन अमेरिका के 20 देशों में से सिर्फ तीन स्थिर लोकतंत्रों में शामिल था। बाकी दो देश कोस्टा रीका और कोलम्बिया थे। 1999 में पूर्व सैन्य अधिकारी ह्यूगो चावेज के राष्ट्रपति बनने के साथ ही वेनेजुएला में लोकतंत्र कमजोर होना शुरू हुआ और वक्त के साथ हालात बिगड़ते गए। […]