पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  मन निरंकुश हो तो परिजनों से हमारे संबंध खराब हो जाते हैं
टिपण्णी

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: मन निरंकुश हो तो परिजनों से हमारे संबंध खराब हो जाते हैं

हमारा मन जहां चाहे, जैसे चाहे, खुद भी दौड़ता है और हमें भी भटकाता है। किसी व्यक्ति-परिस्थिति को देखकर ऐसी लंबी छलांग लगाता है कि हम खुद ही परेशान हो जाते हैं। जब हमारा मन गृहस्थी में निरंकुश होता है, तब परिजनों से हमारे संबंध खराब हो जाते हैं। हमारी सोच निगेटिव हो जाती है, […]

संत की शिष्य को सीख:  अगर कोई हमारी आलोचना कर रहा है, तो तुरंत प्रतिक्रिया देना हमेशा सही नहीं होता, मौन रहना ज्यादा बेहतर है
जीवन शैली/फैशन लाइफस्टाइल

संत की शिष्य को सीख: अगर कोई हमारी आलोचना कर रहा है, तो तुरंत प्रतिक्रिया देना हमेशा सही नहीं होता, मौन रहना ज्यादा बेहतर है

एक लोक कथा है। पुराने समय में एक संत अपने शिष्य के साथ लगातार यात्राएं करते रहते थे। बीच-बीच में वे किसी गांव में कुछ दिन ठहर जाते और वहां के लोगों को उपदेश देकर फिर आगे की यात्रा शुरू करते थे। संत का स्वभाव अत्यंत सरल था और उनकी वाणी में ऐसी मिठास थी […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  पांच इंद्रियों का पंचकर्म आपको मौन में उतार देगा
टिपण्णी

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: पांच इंद्रियों का पंचकर्म आपको मौन में उतार देगा

Hindi News Opinion Pandit Vijay Shankar Mehta Column: Five Senses Panchakarma Leads To Silence 6 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता मौन को शारीरिक क्रिया मानने की भूल न करें। शारीरिक क्रिया चुप्पी है, मौन आत्मिक घटना है। आजकल एआई को फोर्स मल्टीप्लायर कहा जाता है। यानी ताकत को कई गुना बढ़ाने वाला उपकरण। […]