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- Pandit Vijay Shankar Mehta Column: Five Senses Panchakarma Leads To Silence
6 घंटे पहले
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पं. विजयशंकर मेहता
मौन को शारीरिक क्रिया मानने की भूल न करें। शारीरिक क्रिया चुप्पी है, मौन आत्मिक घटना है। आजकल एआई को फोर्स मल्टीप्लायर कहा जाता है। यानी ताकत को कई गुना बढ़ाने वाला उपकरण। हमारे आत्मबल को बढ़ाने वाला उपकरण मौन है। और इसकी आज बहुत आवश्यकता है, क्योंकि देश में लगभग 4 करोड़ लोग एंग्जायटी के शिकार हैं। इसका इलाज मौन में है।
हमारी 10 इंद्रियों में 5 ज्ञानेंद्रियां हैं। इन पांचों का एक पंचकर्म यदि हम कर लें तो मौन घट जाएगा। आंखों को बंद कर लें। यह पहली इंद्री है। नाक से लंबी-लंबी सांस लें, दूसरी। तीसरे, कानों को पूरी तरह से विश्राम दें। श्रवण-शून्य हो जाएं। चौथी इंद्री त्वचा है, इसे शुद्ध वातावरण दें।
और पांचवी इंद्री है जीभ- आप चाहें तो मौन में जीभ को अंदर ही अंदर मोड़ के तालू से लगा लें। ये पांच इंद्रियों का पंचकर्म आपको मौन में उतार देगा। फिर इस भागमभाग के दौर में आप एंग्जायटी से मुक्त होंगे। कोई दबाव नहीं, कोई तनाव नहीं। कुछ आप करें, कुछ होने दें की स्थिति बन जाएगी।









