टिपण्णी

मेघना पंत का कॉलम: पीड़िता को ही कठघरे में खड़ा करने की आदत हमें क्या बताती है?

2014 में तरुण तेजपाल यौन उत्पीड़न मामले के दौरान प्रकाशित एक लेख में उलटे पीड़िता पर ही लांछन लगाने के लिए “बबलगम फेमिनिज्म’ शब्द का इस्तेमाल किया गया था। वह वाक्य मेरे जेहन में रह गया। इसलिए नहीं कि उसमें कोई खास चतुराई थी। बल्कि इसलिए कि इसमें एक खास किस्म की विडम्बना थी- यह […]