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एन. रघुरामन का कॉलम: हमारी जिंदगी में ‘ह्यूमनॉइड्स’ का ‘तड़का’ लगने लगा है

हमारी जिंदगी में ह्यूमनॉइड्स का भरपूर ‘तड़का’ हमारी सोच से भी जल्दी लगने वाला है। यह पहले से लग भी रहा है। चीनी ह्यूमनॉइड रोबोट अब सिर्फ फैक्ट्रियों, वेयरहाउस या लैब्स तक सीमित नहीं हैं। वे अब खेल जैसे क्षेत्र में भी कदम रख रहे हैं, जिसमें निर्विवाद रूप से इंसानों की बढ़त रही है। […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  वर्कप्लेस बदलने वाले हैं, आप भी खुद को बदल लीजिए
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एन. रघुरामन का कॉलम: वर्कप्लेस बदलने वाले हैं, आप भी खुद को बदल लीजिए

‘दिमाग का दही हो गया’- ये बात एक मिडिल लेवल मैनेजर खुद से बड़बड़ा रहा था, क्योंकि वहां उससे बोलने के लिए कोई था ही नहीं। उस बड़े से शॉप फ्लोर पर वह अकेला इंसान था। लेकिन अचानक पीछे से आवाज आई- ‘ये दही क्या होता है?’ उसे पता था कि कौन है। उसने पलटकर […]