टिपण्णी

एन. रघुरामन का कॉलम: क्या हमारी यात्राएं अकेलेपन से जूझ रही हैं

याद हैं वो दिन, जब पूरा परिवार साथ में यात्राएं करता था? तब यात्राएं कभी भी सिर्फ किसी मंजिल तक पहुंचने का नाम नहीं हुआ करती थीं। वे अपने आप में एक इवेंट थीं, उनमें एक रोमांच था और अकसर चलती-फिरती पिकनिक भी। बचपन में हम ट्रेन की खिड़की से चिपके रहते थे और अगले […]