भक्ति के लिए जिन गतिविधियों की आवश्यकता बताई गई, उनमें शामिल हैं नियमित रहना, निरंतरता होना, सचेत होना, एकाग्रता बनाए रखना। तुलसीदास जी ने तो हनुमान चालीसा में लिखा है- नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा। अगर आप भक्ति कर रहे हैं तो निरंतरता बनाए रखिए। और जब ये बातें भक्ति से […]
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: लेन-देन की मुलाकात में भी आत्मीयता को बचाएं
Hindi News Opinion Pandit Vijay Shankar Mehta Column: Maintain Affection In Transactional Meetings 4 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता संबंधों को इतना अच्छा बना लें कि कोई काम रुके ना। इसको जनसम्पर्क की कला कहते हैं। तुलसीदास जी अपने साहित्य में ऐसे संकेत देते रहते हैं। गरुड़ काकभुशुंडि जी के पास पहुंचे तो […]






