उत्तर प्रदेश में जमीनों के मुकदमों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से ई पेशी की सुविधा देने की तैयारी है। इस संबंध में राजस्व परिषद ने शासन को प्रस्ताव भेजा है। इस पर शीघ्र ही सरकार की मुहर लगने की उम्मीद है। यह व्यवस्था तहसीलदार, उपजिलाधिकारी, जिलाधिकारी, मंडलायुक्त और राजस्व परिषद के न्यायालयों में लागू की जाएगी।
वर्तमान में राजस्व वादों में जो भी पक्षकार होते हैं उन्हें संबंधित कोर्ट में व्यक्तिगत उपस्थित होना होता है। इससे मुकदमों के निपटारे में देरी होती है। वादकारियों के धन व समय की भी बर्बादी होती है। सबसे ज्यादा दिक्कत बुजुर्गों और गंभीर रोगियों को होती है, क्योंकि उन्हें हर तारीख पर पहुंचना मुश्किल होता है। इसके चलते कई बार सुनवाई की नई तिथि भी देनी पड़ जाती है।
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सूत्रों के मुताबिक, इन स्थितियों को देखते हुए ई पेशी की सुविधा देने का फैसला किया गया है। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में वर्चुअल सुनवाई की व्यवस्था पहले से है। उसी तर्ज पर राजस्व परिषद ने भी प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव को शीघ्र ही कैबिनेट में ले जाया जाएगा।
पूरी तरह से स्वतः नामांतरण की व्यवस्था भी होगी लागू
प्रदेश में कृषि भूमि के स्वतः (ऑटो) नामांतरण या दाखिल खारिज की व्यवस्था लागू होगी। इसके लिए भी राजस्व परिषद ने शासन को प्रस्ताव भेज दिया है। जब कोई व्यक्ति सब रजिस्ट्रार कार्यालय में भूमि की रजिस्ट्री कराने जाएगा तो सबसे पहले सब रजिस्ट्रार यह चेक करेंगे कि कहीं भूमि आरक्षित श्रेणी की सरकारी तो नहीं है, जिसे खरीदा बेचा न जा सकता हो। इस जांच के बाद क्रेता-विक्रेता को जमीन की रजिस्ट्री कराने की अनुमति दी जाएगी। इसके साथ ही नामांतरण के लिए जरूरी सभी दस्तावेज रजिस्ट्री दफ्तर में ही ले लिए जाएंगे और ऑनलाइन उन्हें अपलोड कर दिया जाएगा जो संबंधित तहसीलदार को पोर्टल पर दिखने लगेंगे। 35 दिन में ऑनलाइन ही लेखपाल और कानूनगो को अपनी रिपोर्ट लगानी होगी। किसी पक्ष से आपत्ति न आने पर स्वतः नामांतरण कर दिया जाएगा।
शुरुआती चरण में पहले से चली आ रही मैनुअल व्यवस्था को भी जारी रखा जाएगा ताकि किसानों को किसी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े। साथ ही ऑटो नामांतरण का विकल्प भी दिया जाएगा।








