श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह की ओर से रामकोट स्थित मंदिर के बाहर बनाए गए एल्यूमिनियम और शीशे के केबिनों के भुगतान को लेकर लगाए गए आरोपों पर महंत शशिकांत दास ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने आरोपों को पूरी तरह झूठा, मनगढ़ंत और राम मंदिर की प्रतिष्ठा को धूमिल करने की कोशिश करार दिया।
महिपाल सिंह ने एसआईटी को भेजे अपने ई-मेल में आरोप लगाया था कि करीब तीन लाख रुपये लागत वाले तीन एल्यूमिनियम और शीशे के केबिनों के लिए 17 लाख रुपये से अधिक का भुगतान किया गया। उनका यह भी आरोप था कि यह कार्यालय शशिकांत दास को ऑब्लाइज करने के लिए बनाया गया, जबकि जगन्नाथ मंदिर, लवकुश मंदिर और रंगमहल में ट्रस्ट को निशुल्क कार्यालय उपलब्ध था।
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इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए महंत शशिकांत दास ने कहा कि यह आरोप पूरी तरह असत्य, दुर्भावनापूर्ण और तथ्यों से परे हैं। राम मंदिर जैसे आस्था के केंद्र को विवादों में घसीटने और समाज में भ्रम फैलाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट ने जिस समय जहां आवश्यकता महसूस की, वहीं कार्यालय संचालित किया। किसी व्यक्ति को लाभ पहुंचाने या खुश करने के लिए कोई निर्णय नहीं लिया गया। ट्रस्ट कार्यालय के लिए कहीं जगह नहीं मिल रही थी।
एक मंदिर ने तो उनसे कार्यालय स्थापित करने के लिए मोटी रकम भी मांगी थी। जब उन्हें पता चला कि कार्यालय के लिए ट्रस्ट को कहीं जगह नहीं मिल रही है तो उन्होंने राम कचहरी मंदिर के आगे का हिस्सा निशुल्क कार्यालय के लिए दिया था। जिस व्यक्ति ने आरोप लगाए हैं, वह पहले संबंधित संस्थाओं के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत करे। बिना प्रमाण के इस तरह के गंभीर आरोप लगाना केवल सनसनी फैलाने की कोशिश है। महंत शशिकांत दास ने कहा कि महिपाल सिंह की बुद्धि भ्रष्ट हो गई है।
उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में व्यक्तिगत आरोपों के जरिये उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जा सकता।








