राजधानी लखनऊ में यूपी एसटीएफ के साथ हुई मुठभेड़ में अंबेडकरनगर निवासी बदमाश संजय उर्फ संजीव मारा गया। इस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। इसने वर्ष 2011 में अयोध्या के दिलीप वर्मा के साथ मिलकर ताबड़तोड़ लूट व हत्याएं की थीं।
जिले के अकबरपुर व महरुआ में लूट व तीन हत्याएं करके जरायम की दुनिया में अपना डंका बजाया। करीब 11 साल तक जेल में निरुद्ध रहने के बाद बाहर आया तो फिर से अपराध की दुनिया में सक्रिय हो गया। साथ ही प्रॉपर्टी डीलिंग का भी काम करने लगा। एनकाउंटर के बाद मृतक के पिता व भाई झूठा फंसाने की दलील दे रहे हैं।
ससुराल में बीतता था अधिकांश समय
मूलरूप से अहिरौली थाना क्षेत्र के चककोडार गांव निवासी संजय उर्फ संजीव के विरुद्ध महरुआ में हत्या, लूट के दो व अकबरपुर में एक मामला दर्ज है। वह लगभग 12 वर्षों तक जेल में भी रहा। जेल से रिहा होने के बाद करीब तीन वर्षों से गांव में रह रहा था। हालांकि, उसका अधिकांश समय गोसाईगंज क्षेत्र के वंदनपुर स्थित अपनी ससुराल में बीतता था।
बताया जा रहा है कि जेल से छूटने के बाद उसने फिर अपराध की दुनिया में जोर आजमाइश शुरू कर दी थी। एनकाउंटर की खबर अहिरौली पुलिस ने परिजनों को दी तो गांव में मातम पसरा गया। पिता हरिराम और भाई राज बब्बर ने कहा कि संजय इस समय प्रॉपर्टी डीलिंग के साथ चीनी मिल में पगास की ढुलाई का काम कर रहा था।
पिता-भाई बोले- इस बार झूठा फंसाया गया
परिजनों का कहना है कि संजय अब परिवार के भरण पोषण की ओर ध्यान दे रहा था। 21 अप्रैल को बहन रूपा की शादी में शरीक हुआ था। करीब 15 दिन से उसका फोन बंद आ रहा था। उसकी तलाश के प्रयास किए जा रहे थे। आरोप है कि संजीव को इस बार झूठा फंसाया गया है।








