आदि कैलाश में पार्वती सरोवर की सतह जमी:  14 दिन बाद शुरू होगी यात्रा; बर्फीले रास्तों के बीच भगवान शिव के होंगे दिव्य दर्शन – Pithoragarh News
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आदि कैलाश में पार्वती सरोवर की सतह जमी: 14 दिन बाद शुरू होगी यात्रा; बर्फीले रास्तों के बीच भगवान शिव के होंगे दिव्य दर्शन – Pithoragarh News

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अप्रैल महीने में बर्फ की मोटी चादर से ढका आदि कैलाश।

उत्तराखंड में आदि कैलाश इस समय बर्फ की मोटी चादर से ढका हुआ है। हालात ऐसे हैं कि पवित्र पार्वती सरोवर की सतह तक जम चुकी है, जो आमतौर पर अप्रैल में खुले पानी के रूप में दिखाई देती है। ऐसे में 14 दिन बाद शुरू होने वाली यात्रा में श्रद्धालुओं को बर्फीले

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आदि कैलाश समुद्र तल से करीब 14,600 फीट की ऊंचाई पर पिथौरागढ़ जिले के ज्योलिंगकांग में स्थित है। फिलहाल पूरे क्षेत्र में भारी बर्फ जमी है और तापमान -7°C बना हुआ है। ऐसे में 1 मई तक पूरी तरह सामान्य हालात बनना मुश्किल नजर आता है, लेकिन मौसम साफ रहा तो प्रशासन मार्ग को सुचारु करने में सफल हो सकता है।

इस बार अप्रैल में बर्फ से जमी पवित्र पार्वती सरोवर की सतह।

इस बार अप्रैल में बर्फ से जमी पवित्र पार्वती सरोवर की सतह।

जानिए कैसा होगा आदि कैलाश यात्रा का अनुभव

इस बार श्रद्धालुओं को एक अलग ही आध्यात्मिक और रोमांचक अनुभव मिलेगा। मंदिर, पहाड़ और पूरा परिसर बर्फ की सफेद चादर में ढका रहेगा, जिससे पूरा क्षेत्र ‘सफेद धाम’ जैसा नजर आएगा। ठंडी हवाओं, बर्फीले रास्तों और जमी झील के बीच शिव-पार्वती के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए दुर्लभ और यादगार अनुभव बनेंगे। हालांकि कड़ाके की ठंड के कारण यात्रा थोड़ी कठिन जरूर होगी, लेकिन यही बर्फीला माहौल इसे और ज्यादा खास बना देगा।

यहीं स्थित पार्वती सरोवर धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है, जहां सामान्य दिनों में श्रद्धालु स्नान कर शिव-पार्वती मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं। लेकिन इस बार सरोवर की जमी सतह ने इस स्थल को और भी अलौकिक बना दिया है।

अब यात्रा की तैयारी के बारे में पढ़िए…

1 मई को खुलेंगे कपाट, बर्फ के बीच तैयारियां तेज

आदि कैलाश स्थित शिव-पार्वती मंदिर के कपाट इस वर्ष 1 मई को विधि-विधान के साथ खुलेंगे। कुटी गांव के पुजारी पारंपरिक रीति-रिवाजों से पूजा-अर्चना करेंगे। कपाट खुलते ही यात्रा औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगी। ग्राम प्रधान नगेंद्र कुटियाल के अनुसार, क्षेत्र में अब भी बर्फबारी का असर है, लेकिन ग्रामीण धीरे-धीरे पशुओं के साथ गांव लौटने लगे हैं। इससे साफ है कि स्थानीय स्तर पर यात्रा की तैयारियां तेज हो चुकी हैं।

मौसम की चुनौती के बावजूद प्रशासन सक्रिय है। धारचूला के एसडीएम आशीष जोशी ने कुटी से ज्योलिंगकांग तक व्यवस्थाओं का जायजा लिया है। राहत की बात है कि मार्ग फिलहाल खुला है, जिससे यात्रा संचालन की उम्मीद बनी हुई है।

होम स्टे संचालक भी तैयारियों में जुटे हैं। ठहरने, साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त किया जा रहा है।

पानी-सड़क पर फोकस, गैस संकट के बीच इंतजाम

यात्रियों को परेशानी न हो, इसके लिए ग्राम गुंजी में टैंकर से पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही पेयजल योजनाओं को जल्द सुचारु करने पर जोर है।

बीआरओ को सड़कों की मरम्मत, गड्ढे भरने और संवेदनशील मार्गों को सुरक्षित बनाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बर्फ के बीच भी यात्रा सुचारु रहे।

गैस की संभावित कमी को देखते हुए होम स्टे संचालकों से वैकल्पिक संसाधनों के उपयोग की अपील की गई है। साथ ही यात्रियों को बेहतर सुविधा, स्वच्छता और सहयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

परमिट नियम पहले जैसे, स्थानीयों को राहत

आदि कैलाश यात्रा के लिए इनर लाइन परमिट (आईएलपी) इस वर्ष भी पहले की तरह ही जारी किए जाएंगे। प्रशासन ने साफ किया है कि नियमों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

हालांकि स्थानीय निवासियों को राहत दी गई है। धारचूला क्षेत्र के लोग अब आधार कार्ड के आधार पर यात्रा कर सकेंगे, जिससे उन्हें बार-बार औपचारिकताओं से नहीं गुजरना पड़ेगा।

पिथौरागढ़ में स्थित शिव-पार्वती मंदिर और सरोवर।

पिथौरागढ़ में स्थित शिव-पार्वती मंदिर और सरोवर।

फर्जी परमिट पर सख्ती, प्रशासन अलर्ट

पिछले वर्ष सामने आए फर्जी परमिट मामलों को देखते हुए इस बार प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। सभी कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) और कंप्यूटर सेंटर संचालकों को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि किसी भी तरह की गड़बड़ी पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। धारचूला के एसडीएम आशीष जोशी ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों और मौसम अनुकूल रहने पर 1 मई 2026 से आदि कैलाश यात्रा के लिए पास जारी किए जाएंगे।

उन्होंने स्पष्ट किया कि आईएलपी के लिए इस वर्ष भी वही दस्तावेज और नियम लागू रहेंगे, जो पिछले साल तक प्रभावी थे- इनमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।

एसडीएम ने बताया कि इस बार प्रशासन विशेष सतर्कता बरत रहा है। किसी भी तरह के फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आईएलपी जारी नहीं की जाएगी। यदि कोई व्यक्ति, सीएससी या कंप्यूटर सेंटर इसमें लिप्त पाया गया, तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

आदि कैलाश के साथ ही ओम पर्वत भी बर्फ से ढका।

आदि कैलाश के साथ ही ओम पर्वत भी बर्फ से ढका।

ओम पर्वत भी बर्फ से लकदक

आदि कैलाश के साथ ही प्रसिद्ध ओम पर्वत भी इस समय बर्फ से पूरी तरह ढका हुआ है। हाल ही में हुई बर्फबारी के कारण यहां की सड़कें और रास्ते भी सफेद चादर में नजर आ रहे हैं।

ओम पर्वत का यह दृश्य श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। माना जा रहा है कि इस बार यात्रा सीजन में यहां आने वालों को पहले से ज्यादा खूबसूरत और बर्फीले नजारे देखने को मिलेंगे।

2023 में पीएम मोदी ने की थी आदि कैलाश यात्रा

साल 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड दौरे के दौरान आदि कैलाश क्षेत्र का भ्रमण किया था। तब उन्होंने पिथौरागढ़ जिले में स्थित आदि कैलाश और पार्वती कुंड में पूजा-अर्चना की, साथ ही कुमाऊं के प्रसिद्ध जागेश्वर धाम में भी दर्शन किए थे।

आदि कैलाश यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने ध्यान लगाया था।

आदि कैलाश यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने ध्यान लगाया था।

यात्रा के बाद प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने अनुभव साझा करते हुए लिखा था,

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यदि कोई मुझसे पूछे कि उत्तराखंड में एक जगह जरूर देखनी चाहिए तो मैं कहूंगा कि कुमाऊं क्षेत्र में पार्वती कुंड और जागेश्वर मंदिर अवश्य जाएं। यहां की प्राकृतिक सुंदरता और दिव्यता आपको मंत्रमुग्ध कर देगी।

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पीएम मोदी की दो साल पुरानी एक्स पोस्ट।

पीएम मोदी की दो साल पुरानी एक्स पोस्ट।

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