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- N. Raghuraman’s Column – Good Manners Are The Secret Keys To The World
57 मिनट पहले
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एन. रघुरामन मैनेजमेंट गुरु
हममें से ज्यादातर को याद होगा कि हम परिवार के साथ डिनर टेबल पर बैठ कर आंखें बंद किए उन प्रार्थनाओं को दोहराते थे, जिन्हें पिताजी बोलते थे। जब हम पूछते कि इन प्रार्थनाओं का मतलब क्या है तो वे समझाते कि यह ईश्वर के प्रति धन्यवाद जताने का तरीका है, जिसने परिवार को इकट्ठा होकर शांति से भोजन करने में मदद की। बचपन में हमने आभार जताना सीखा। आज भी हम अपने बच्चों को थैंक यू कहने की अहमियत सिखाते हैं। लेकिन समय के साथ क्या रोजमर्रा की जिंदगी में ये सहज शब्द गायब होने लगे हैं?
मेरा मानना है कि ऐसा हुआ है। आज की ‘मी फर्स्ट’ सोसायटी में ‘थैंक यू’ जैसे दो सरल शब्द मानो चलन से बाहर हो रहे हैं। हम दूसरों से हमारी मदद, सेवा और अकॉमोडेट करने की उम्मीद तो करते हैं, लेकिन उनकी कोशिशों को एक्नॉलेज करना भूल जाते हैं। कॉमेडियन और लेखिका एमी पोहलर अपनी किताब ‘यस प्लीज’ में एक बेहतरीन रिमाइंडर पेश करती हैं।
वे लिखती हैं कि ‘अच्छे मैनर्स ही दुनिया की सीक्रेट चाबियां हैं।’ वे समझाती हैं कि क्यों वे चाहती हैं कि उनके बच्चे पोलाइट बनें। अच्छे मैनर्स का मतलब महज सामाजिक नियमों का पालन करना नहीं है। इससे हमें अच्छे रिश्ते बनाने और सबकी जिंदगी अधिक बेहतर बनाने में मदद मिलती है। एग्जीक्यूटिव कोच और लेखक पीटर ब्रेगमैन ने ‘हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू’ में आभार जताने के महत्व को एक्सप्लोर किया है।
वे कहते हैं कि थैंक यू कहना किसी के प्रयास, थॉटफुलनेस और कार्य को ही नहीं, बल्कि उस प्रयास के पीछे मौजूद व्यक्ति को भी स्वीकार करना है। ऐसी रिकॉग्निशन देना किसी को महसूस करा सकता है कि उसका योगदान मायने रखता है। अपने काम से कई पीढ़ियों को प्रभावित करने वाली शिष्टाचार विशेषज्ञ एमिली पोस्ट ने दूसरों का ख्याल रखने और खुद का सम्मान करने पर जोर दिया था।
मैनर्स का मतलब यही नहीं कि डिनर टेबल पर हम किस कांटे का इस्तेमाल करते हैं या औपचारिक डाइनिंग रूल्स का कितना बेहतर पालन करते हैं। उनका मतलब है कि हम लोगों को कैसे ट्रीट करते हैं। रोजमर्रा की कुछ स्थितियों पर गौर कीजिए, जहां विनम्रता फर्क ला सकती है।
गेट खोलने वाले सिक्योरिटी गार्ड, आसपास की जगह साफ रखने वाले हाउसकीपिंग कर्मचारी, समय पर काम निपटाने में मदद करने वाले सहकर्मी या आपके लिए दरवाजा खुला रखने वाले किसी अनजान व्यक्ति को थैंक यू कहिए। कोई चीज मांग रहे हैं तो ‘प्लीज’ कहिए। गलती करें तो माफी मांगिए। बीच में काटे बिना किसी की बात सुनिए।
इन छोटी-छोटी बातों में कुछ खर्च नहीं होता, लेकिन ये किसी का दिन बना सकती हैं। या फिर, क्या बदले में थोड़ी-सी एक्नॉलेजमेंट की उम्मीद करना हमारी छोटी सोच है? हम बड़े शहरों में रहते हैं और छोटे शहर भी तेजी से बढ़ रहे हैं। लोग एक से दूसरी जगह भाग रहे हैं। उनकी नजरें फोन पर या कानों में ईयरबड्स होते हैं। हो सकता है कि वे सचमुच व्यस्त हों। फिर भी मेरा सवाल है कि किसी के दयालुता भरे छोटे-से कार्य को स्वीकार करने में आखिर मुश्किल क्या है?
कल्पना कीजिए कि आप किसी अनजान व्यक्ति के लिए दरवाजा खुला रखते हैं, ताकि वह उसके मुंह पर बंद न हो। लेकिन वह बिना थैंक यू कहे, बिना मुस्कुराए और यहां तक कि बिना सिर हिलाए निकल जाए। उस छोटे-से जेस्चर के लिए धन्यवाद कहने में बमुश्किल एक सेकंड लगता है। क्या हम अपनी भागदौड़ में खुद को इतना महत्वपूर्ण समझने लगे हैं कि किसी दूसरे इंसान के लिए एक सेकंड भी नहीं निकाल सकते? इन जेस्चर्स में कुछ खर्च नहीं होता, लेकिन इनकी गैरमौजूदगी लोगों को महसूस करा सकती है कि उस इंसान का कोई महत्व नहीं है।
मैनर्स की असली परीक्षा यह नहीं कि हम किसी प्रभावशाली व्यक्ति को कितनी विनम्रता से ट्रीट करते हैं, बल्कि यह है कि हम उस व्यक्ति से कैसा व्यवहार करते हैं, जिससे बदले में कुछ मिलने की उम्मीद नहीं है। हो सकता है कि दरवाजा खुला रखने वाला व्यक्ति किसी तारीफ की उम्मीद न कर रहा हो। लेकिन आपका छोटा-सा एक्नॉलेजमेंट उन्हें बता देता है कि उनकी विचारशीलता नोटिस कर ली गई है। गुड मैनर्स का मतलब आभार की उम्मीद करना नहीं, बल्कि यह है कि हम दयालुता को हल्के में न लें।
फंडा यह है कि एक-दूसरे के प्रति आभार जताना उन इंसानों के तौर पर हमारी बुनियादी जिम्मेदारी है, जो दूसरे इंसानों के साथ एक समुदाय में रहते हैं। दरअसल, मैं अपने सभी पाठकों से कहना चाहता हूं कि ‘मेरा लेख पढ़ने के लिए आपका थैंक यू।’








