कानपुर में पुलिस अक्सर मामलों की लिखापढ़ी में लापरवाही करती है। 35 साल पुराने मुठभेड़ के मामले में उसकी यह लापरवाही आज 12 पुलिसकर्मियों पर भारी पड़ गई। दरअसल पुलिस ने डीसीएम को लूटने वालों की मुठभेड़ का समय रात एक बजे दिखाया, जबकि जिनके साथ वारदात का प्रयास हुआ। उन चालकों से मुठभेड़ के संदर्भ में चश्मदीद गवाही अगले दिन सुबह 11 बजे की दिखाई। यही 10 घंटों का अंतर पुलिस की छीछालेदर का कारण तब बना।
जब 164 के बयान में डीसीएम चालक उमाशंकर और क्लीनर बृजेंद्र सिंह ने पूरे मामले की हकीकत बयां कर दी। दोनों ने बताया कि पुलिस ने उन दोनों से जबरन कागज में हस्ताक्षर कराए थे। जानकारों के मुताबिक मुठभेड़ और गवाही के समय में एक-दो घंटे का अंतर तो चल जाता है, लेकिन 10 घंटों का फर्क काफी होता है। बस यहीं से शुरू हुई सीबीसीआईडी की जांच 16 अक्तूबर को प्राथमिकी में तब्दील हो गई।