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जिंदगी अगर सिर्फ जिम्मेदारियों, तनाव और दुख देने वाली खबरों का सिलसिला बन जाए, तो इंसान भीतर से थकने लगता है। वॉशिंगटन की सामंथा ग्रिंडेल कुछ ऐसा ही महसूस कर रही थीं। वह फ्लू से उबर रही थीं। मोबाइल पर डर भर देने वाली खबरों के बीच वह अपनी मां की मौत की 10वीं बरसी और कुछ महीने पहले दादी के निधन के गम में थीं। सामंथा को लगा, दिन किसी खराब तारीख की तरफ घिसटते जा रहे हैं। तब उन्होंने सोचा कि कुछ बदलना ही होगा। तभी उन्हें सोशल मीडिया में लोकप्रिय हुए खास शब्द ‘व्हिम्सी’ के बारे में पता चला। उन्होंने गूगल किया, तो पता चला कि व्हिम्सी का अर्थ है- मनमौजीपन और ऐसी सनक, जो उन छोटी-छोटी खुशियों को फिर से जीने से जुड़ा हो, जिन्हें उम्र के साथ पीछे छोड़ आए हैं। सामंथा ने वही किया। वे बचपन की छोटी-छोटी खुशियों को जीने लगीं। जैसे- मोमबत्ती जलाना। कंचे खेलना और रंगीन कपड़े पहनना। आमतौर पर लोग इसे बेवकूफी मान लेते हैं। सामंथा ने इसे थेरेपी बनाया। उन्होंने दोस्तों को हाथ से लिखे खत भेजे। इसमें न कोई प्रेरक भाषण, न बेमिसाल दिखने का दबाव; बस इतना कि जीवन में हल्के, खुशहाल पल खुद गढ़ लिए जाएं। उनको दुख, चिंता और अकेलेपन के बोझ से राहत महसूस हुई। लोग इसे ‘व्हिम्सिकल’ होना कह रहे हैं। यानी जब भी मौका मिले, जिंदगी में हल्कापन वापस लाएं। जैसे आप बचपन में खिलंदड़ी मौज लेते हैं। सांमथा कहती हैं कि कुछ हफ्तों में उनका गम तो खत्म नहीं हुआ। मां और दादी की कमी वही रही। लेकिन उन्होंने महसूस किया कि ये छोटे‑छोटे ‘हल्के’ काम उन्हें दिनभर के डर और अकेलेपन से थोड़ा बाहर निकाल रहे हैं। डिजाइनर व लेखिका जेना ओ’ब्रायन कहती हैं, ‘व्हिम्सी खुशी की तलाश में पैदा होती है। यह हमें उन चीजों से फिर जोड़ती है, जिनसे कभी उत्साहित हुआ करते थे। खुशी इंतजार करने से नहीं, बनाने से आती है। इससे रिश्ते मजबूत होंगे, छोटी चीजों में भी संतोष मिलेगा। उपाय- जिम्मेदारियों के बीच पंसदीदा काम करना जरूरी विशेषज्ञों के अनुसार, व्हिम्सिकल होना छोटी-छोटी बातों में उत्साह ढूंढ़ने की कला है। इसका मतलब यह नहीं कि दुख या जिम्मेदारियां खत्म हो जाएंगी, बल्कि दुख के बीच भी अपने लिए छोटे-छोटे जादुई पल बना लें। जैसे अपनी पसंदीदा पेंटिंग, कढ़ाई या ऐसे ही काम करना, जिसे पीछे छोड़ आए हैं। इसमें पसंदीदा गाना सुनना या हाथ से चिट्ठी लिखना भी शामिल कर सकते हैं। ओ’ब्रायन कहती हैं, ‘जब आप कुछ हटकर करते हैं या किसी और को खुशी देते हैं, तो इससे आनंद की अनुभूति होती है।’
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