दिल्ली रिज का होगा वैज्ञानिक पुनरुद्धार:  120 हेक्टेयर में लगेंगे 1.81 लाख देशी पौधे, एलजी के निर्देश पर डीडीए का अभियान तेज – New Delhi News
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दिल्ली रिज का होगा वैज्ञानिक पुनरुद्धार: 120 हेक्टेयर में लगेंगे 1.81 लाख देशी पौधे, एलजी के निर्देश पर डीडीए का अभियान तेज – New Delhi News

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दिल्ली के “ग्रीन लंग्स” माने जाने वाले रिज क्षेत्र को फिर से प्राकृतिक स्वरूप देने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने वैज्ञानिक पारिस्थितिक पुनरुद्धार (इकोलॉजिकल रेस्टोरेशन) अभियान शुरू किया है। उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू के निर्देश पर शुरू हुआ, यह अभियान दिल्ली रिज के स्वीकृत वर्किंग प्लान के तहत चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य देशी वनस्पतियों को बढ़ावा देकर जैव विविधता मजबूत करना, भूजल संरक्षण, कार्बन अवशोषण और वायु प्रदूषण में कमी लाना है। यह अभियान केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा शुरू किए गए ‘एक पेड़ मां के नाम’ और 70 लाख पौधारोपण मिशन का हिस्सा है। इस मिशन के तहत डीडीए को दिल्ली में 23 लाख देशी पौधे लगाने का लक्ष्य मिला है। जुलाई के पहले सप्ताह से अब तक डीडीए 8.29 लाख पौधे लगा चुका है, जिनमें 35,570 पेड़ और 7.93 लाख से अधिक झाड़ियां शामिल हैं। अकेले रिज क्षेत्र में 27,062 पौधे लगाए जा चुके हैं। डीडीए का कहना है कि यह अभियान केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे वन पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इससे पक्षियों, तितलियों और अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास बहाल होंगे, जबकि ‘अर्बन हीट आइलैंड’ प्रभाव और धूल प्रदूषण में भी कमी आएगी।
120 हेक्टेयर में हटेंगे विदेशी पेड़, लगेंगे देशी पौधे
-नानकपुरा, कमला नेहरू, साउथ सेंट्रल और सेंट्रल रिज में अभियान।
-करीब 16,240 विदेशी (आक्रामक) पेड़-झाड़ियां हटाई जाएंगी।
-उनकी जगह 1 लाख देशी पेड़ और 81,700 देशी झाड़ियां लगाई जाएंगी।
-बरगद, पीपल, नीम, अर्जुन, शीशम, जामुन, ढाक और खेजड़ी प्रमुख प्रजातियां होंगी।
वैज्ञानिक मॉडल से होगा पौधारोपण
डीडीए ग्रिड-आधारित और मल्टी-टियर मॉडल अपना रहा है। प्रत्येक ग्रिड में पांच देशी पेड़ और चार झाड़ियां निर्धारित दूरी पर लगाई जा रही हैं, जबकि नियमित अंतराल पर पीपल और बरगद जैसे फिकस प्रजाति के क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। इस मॉडल से प्राकृतिक जंगल जैसी बहु-स्तरीय संरचना तैयार होगी, जिससे पौधों की जीवित रहने की क्षमता बढ़ेगी और दीर्घकाल में रिज क्षेत्र अधिक घना एवं पर्यावरणीय रूप से मजबूत बन सकेगा।



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