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दुनिया के सबसे बड़े और सफल निवेशकों में शुमार वॉरेन बफे और माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स की दोस्ती दशकों पुरानी है। दोनों ने मिलकर ‘द गिविंग प्लेज’ शुरू किया था। यह अरबपतियों को संपत्ति दान करने के लिए प्रेरित करने वाला अभियान है। बफे खुद गेट्स फाउंडेशन के संस्थापक ट्रस्टी रह चुके हैं और 2022 तक उसे 3.46 लाख करोड़ दान में दे चुके थे। लेकिन इस साल कहानी बदल गई। बफे ने गेट्स फाउंडेशन को कुछ नहीं दिया। इसकी बजाय, 95 साल के बफे ने बर्कशायर हैथवे के करीब 6 अरब डॉलर (57,600 करोड़) के शेयर अपने परिवार से जुड़े चार फाउंडेशन को सौंप दिए। इसकी एक खास वजह है। गेट्स फाउंडेशन ने बाहरी वकीलों को बुलाकर एक जांच शुरू करवाई है। पता लगाया जा रहा है कि दोषी यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के साथ फाउंडेशन के क्या संबंध थे। बफे इसी जांच का नतीजा आने का इंतजार कर रहे हैं। इसीलिए उन्होंने फाउंडेशन को दान रोक दिया। असल कहानी यहीं से दिलचस्प मोड़ लेती है। बफे ने इस साल मार्च में सीएनबीसी को दिए इंटरव्यू में साफ कह दिया था कि वे अब गेट्स से बात नहीं करते। उन्होंने कहा, ‘हमने साथ बहुत अच्छा वक्त बिताया, लेकिन जब तक यह मामला साफ नहीं होता, मुझे नहीं लगता कि ज्यादा बातचीत करना ठीक है।’ गेट्स ने पिछले महीने अमेरिकी संसद की एक समिति के सामने गवाही दी कि उन्हें एपस्टीन के अपराधों की जानकारी नहीं थी। बफे ने भी साफ किया कि उनकी एपस्टीन से कभी मुलाकात नहीं हुई। उन्होंने गेट्स से इस विवाद पर कभी बात नहीं की क्योंकि वे नहीं चाहते कि उन्हें गेट्स-एपस्टीन संबंधों पर गवाही देने के लिए बुलाया जाए। हालांकि उम्र और इस विवाद के बावजूद बफे की दानशीलता कम नहीं हुई है। बफे ने कहा है कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि उनके तीनों बच्चे 31 2034 तक बर्कशायर हैथवे में उनकी पूरी हिस्सेदारी बांट देंगे। फाउंडेशन के बोर्ड से हट चुके हैं 31 लाख करोड़ की संपत्ति के मालिक बफे बर्कशायर हैथवे की कुल वैल्यू करीब 1.1 ट्रिलियन डॉलर (105.7 लाख करोड़ रुपए) आंकी गई है। इसमें बफे की हिस्सेदारी लगभग 30% है। यानी अकेले उनकी हिस्सेदारी की वैल्यू 31.7 लाख करोड़ बैठती है। बफे 2021 में गेट्स फाउंडेशन के बोर्ड से इस्तीफा दे चुके हैं। लेकिन तब से हर साल हजारों करोड़ रुपए का दान जारी रखे हुए थे। लेकिन इस साल उन्होंने यह सिलसिला तोड़ दिया।
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