बुजुर्ग माता-पिता की सेहत पर चुप्पी पड़ सकती है भारी:  सिर्फ हाल-चाल न पूछें, माता-पिता की मेडिकल हिस्ट्री भी अपडेट रखें: डॉक्टरों की सलाह
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बुजुर्ग माता-पिता की सेहत पर चुप्पी पड़ सकती है भारी: सिर्फ हाल-चाल न पूछें, माता-पिता की मेडिकल हिस्ट्री भी अपडेट रखें: डॉक्टरों की सलाह

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भारत समेत दुनिया में लोग अब पहले से ज्यादा लंबी उम्र जी रहे हैं। उम्र बढ़ने के साथ कई बीमारियां भी होने लगती हैं। जबकि अक्सर हम सभी अपने बुजुर्ग माता-पिता की सेहत को लेकर तब तक अनजान रहते हैं, जब तक कि कोई हादसा न हो जाए या आपात स्थिति न आ जाए, जैसे- चक्कर आना, गिर जाना। इसकी क्या वजह है? यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया की जरा चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. लुईस आरोनसन कहती हैं कि बेटे या बेटियां अकसर बुजुर्ग मां-पिता से उनके स्वास्थ्य और शरीर की कमजोरी के बारे में बात नहीं करते है। इस चुप्पी का नुकसान सभी को होता है। आपात हालात में भटकते हैं भाई-बहनों में टकराव होता है। वहीं माता-पिता की इच्छाएं भी अनसुनी-अनदेखी रह जाती हैं और बाद में पछतावा भी होता है। मूल स्थिति को जानें अचानक बीमार पड़ने पर डॉक्टरों के पास पहले की बीमारियों की पूरी जानकारी नहीं होती। इसलिए उनकी रोजमर्रा की कार्यक्षमता को समझना जरूरी है। यूनिवर्सिटी ऑफ मियामी की डॉ. सबरीना टालडोन कहती हैं कि पहले उनकी दिनचर्या के बारे में पूछें। फिर धीरे-धीरे चलने-फिरने और याद्दाश्त से जुड़ी बातें करें। सीधे सवाल पूछने की बजाय यह जानें कि वे किन कामों से बचते हैं, जैसे सीढ़ियां चढ़ना, रात में गाड़ी चलाना या बिल भरने में दिक्कत। सेवा: जानें कि माता-पिता की प्राथमिकताएं क्या हैं? बीमारी के समय कई फैसले लेने होते हैं। इसलिए पहले से यह जानना जरूरी है कि दादा-दादी, माता-पिता की प्राथमिकताएं क्या हैं। वे घर में रहना चाहते हैं या हर हाल में इलाज कराना चाहते हैं या मशीनों के सहारे जिंदा नहीं रहना चाहते। यह बातचीत परिवार के साथ मिलकर करें, ताकि कोई अकेला महसूस न करे और सभी को सोचने का समय मिले। यूनिवर्सिटी ऑफ मियामी की डॉ. सबरीना टालडोन कहती हैं कि अगर माता-पिता बोलने की स्थिति में न हों, तो कोई एक व्यक्ति होना चाहिए, जो मेडिकल फैसले ले सके। यह जिम्मेदारी तय करना जरूरी है। इलाज की जानकारी रखें हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की मेडिसिन प्रोफेसर डॉ. नमिता सेठ मोहता बताती हैं कि बुजुर्ग माता-पिता की दवाओं की सूची, डॉक्टरों के नाम-नंबर, एलर्जी और पुरानी सर्जरी की जानकारी रखें। यह इमरजेंसी में डॉक्टर को सही इलाज में मदद करता है। अगर वे कुछ दवाएं नहीं ले रहे हैं, तो उसका कारण भी जानें। फार्मेसी का नाम और नंबर भी नोट करें, ताकि जरूरत पड़ने पर डॉक्टर वहां से जानकारी ले सकें। यह सब फोन में सेव करें और एक कॉपी पर्स में भी रखें।



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