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अक्सर किसी महफिल या मीटिंग के बाद हमें अपनी निजी बातें साझा करने पर ‘डिस्क्लोजर हैंगओवर’ यानी पछतावा होता है। लगता है कि ज्यादा बोलना हमारे करिअर या छवि के लिए जोखिम बन सकता है। लेकिन हार्वर्ड की प्रोफेसर और व्यवहार वैज्ञानिक लेस्ली जॉन अपनी किताब ‘रिवीलिंग’ में इस सोच को चुनौती देती हैं। जॉन के मुताबिक, सही तरीके से की गई ‘ओवरशेयरिंग’ (जरूरत से थोड़ा ज्यादा खुलकर बोलना) दोस्ती, प्यार, करिअर और सेहत के लिए फायदेमंद हो सकती है। उनका कहना है कि जब हम अपनी कमियां या निजी किस्से ईमानदारी से साझा करते हैं, तो सामने वाला हम पर ज्यादा भरोसा करने लगता है। वे बताती हैं कि यह खुलापन रिश्तों में गहराई और मजबूती लाता है। यानी जिसे हम कई बार ‘गलती’ मान लेते हैं, वही लोगों का भरोसा जीतने और जिंदगी में आगे बढ़ने की एक बड़ी ताकत बन सकती है। ऑफिस में 85% लोग ज्यादा खुलने वालों की तरफ खिंचते हैं ऑफिस में अपनी कमियां साझा करना कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत है। अध्ययन के अनुसार, 85% कर्मचारी साथियों और अपनी बीमारियों या थेरेपी जैसी निजी बातें बताने वालों को पसंद करते हैं। इसके अलावा, जो लीडर अपनी पुरानी नाकामियों या डर को खुलकर स्वीकार करते हैं, उन पर टीम का भरोसा बढ़ जाता है। ऐसे नेतृत्व को अधिक प्रेरक माना जाता है, जो कार्यस्थल पर रिश्तों को मजबूती प्रदान करता है। जेन जी गहरी बातचीत से ज्यादा हिचकती है हिंज 2025 रिपोर्ट के अनुसार, 84% जेन-जी यूजर्स रिश्तों में गहराई तो चाहते हैं, लेकिन वे पहली डेट पर गंभीर बातचीत करने से हिचकते हैं। मिलेनियल्स की तुलना में 14-29 साल के युवाओं में हिचकिचाहट 36% ज्यादा है। डेटिंग का मंत्र-सच बोलने वाले किए जाते हैं ज्यादा पसंद एक प्रयोग के अनुसार, डेटिंग में रहस्यमयी लोगों के बजाय स्पष्ट बोलने वाले अधिक पसंद किए जाते हैं। अपनी पुरानी गलतियां ईमानदारी से स्वीकार करने वाले लोग दूसरों के लिए अधिक आकर्षक व भरोसेमंद साबित हुए। फीलिंग्स शेयर करना जरूरी लेस्ली जॉन के अनुसार, लंबे रिश्तों में खामोशी खतरनाक है। अक्सर रिश्ते बड़े झगड़ों से नहीं, बल्कि संवाद की कमी से टूटते हैं। वर्षों बाद कपल्स खुद को अजनबी महसूस करने लगते हैं। इसे खत्म करने का सबसे सरल उपाय भावनाओं को खुलकर साझा करना है।
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