नई दिल्ली2 घंटे पहले
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जेल में बंद प्रतिबंधित जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) चीफ मोहम्मद यासीन मलिक ने कश्मीरी पंडित महिला की हत्या के मामले में अपनी भूमिका से इनकार किया है। यासीन ने 25 पेज का हलफनामा दायर किया है, जिसमें उन्होंने कोर्ट से अपने लिए फांसी की मांग की है।
यासीन मलिक फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं। उन पर सरला भट की हत्या का आरोप है। हालांकि मलिक ने खुद को बेगुनाह बताया है, लेकिन केस लड़ने से इनकार करते हुए मौत की सजा की मांग की है।
उन्होंने दावा किया कि उन पर लगे आरोप असली पुलिस जांच के बजाय मनगढ़ंत कहानी जैसे लगते हैं। यह केस उन्हें फंसाने के लिए दशकों बाद बनाया गया था।
मलिक का यह हलफनामा तब आया है जब स्टेट इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसी (SIA) ने 29 जून को सरला भट की हत्या के मामले में चार्जशीट दाखिल की।

पत्नी को भी तलाक देने की बात लिखी
60 साल के मलिक ने हलफनामे में अपनी पत्नी मुशाल हुसैन से शादी खत्म करने का फैसला भी बताया। उन्होंने कहा कि इसकी वजह लंबी कैद और पिछले 8 साल से परिवार से बातचीत न कर पाना है। यासीन ने कहा कि उन्हें फोन कॉल या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा नहीं दी गई।

मलिक ने हलफनामे में अपनी पत्नी के लिए लिखा, “फांसी पर चढ़ने से पहले, मैंने हमारे निकाह के बंधन से तुम्हें अलग करने का फैसला किया है। मैं नहीं चाहते कि तुम अपनी बाकी जिंदगी मेरे हालात का बोझ ढोते हुए, विधवा बनकर बिताओ।”
मलिक ने अपनी बेटी रजिया सुल्ताना को सलाह दी कि वह हर दिन 5 मिनट के लिए अपने दादा-दादी से बात करे। उन्होंने लिखा है- “मेरी डेथ सेल (मौत की कोठरी) में सिर्फ मैं और तुम्हारी तस्वीर है। तुम्हारी तस्वीर के जरिए, मुझे दिन के चौबीसों घंटे तुम्हारे साथ होने का एहसास होता है।”

यासीन के हलफनामे में लिखी बड़ी बातें…
- चार्जशीट दाखिल होने से पहले SIA के 3 अधिकारी तिहाड़ जेल में मिलने आए थे और केवल दो आरोपों के बारे में पूछताछ की थी। पहला- JKLF के नोट से जुड़ा जिसमें जिम्मेदारी का दावा और जावेद मीर, शेख अब्दुल हामिद और मोहम्मद यासीन मलिक के नाम थे।
- दूसरा, JKLF ने भट की हत्या का आदेश दिया था क्योंकि उन्हें शक था कि वह सुरक्षा कर्मियों को हाफिज बजाज के घर में मलिक की मौजूदगी के बारे में जानकारी दे रही थीं। अगर यह नोट घटनास्थल से मिला, तो 3 लोगों को 30 साल तक आरोपी क्यों नहीं बनाया।
- तत्कालीन गवर्नर जगमोहन को कश्मीरी पंडित समुदाय का बड़ा वर्ग अपना रक्षक मानता था, लेकिन उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि मलिक, भट या किसी कश्मीरी पंडित की हत्या के लिए जिम्मेदार थे।

- जब अगस्त 1990 में गिरफ्तार किया गया, तब TADA के तहत लगभग दो दर्जन मामले दर्ज किए गए थे, लेकिन भट की हत्या के मामले में कभी आरोपी नहीं बनाया गया।
- अप्रैल 1990 में नरवारा में BSF की छापेमारी के दौरान एक इमारत से गिरने के कारण मैं कोमा में था। सरकारी चैनल दूरदर्शन समेत कई चैनलों ने मुझे मरा घोषित कर दिया था।
- यह समझ से परे है कि जो व्यक्ति बेहोश था, जिंदगी के लिए लड़ रहा था। जिसे मरा हुआ मान लिया था, वह अपराध कैसे कर सकता है। उसके लिए निर्देश कैसे दे सकता है।








