राहुल का आरोप- ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का मकसद सुरक्षा नहीं:  एक बिजनेसमैन को फायदा पहुंचाना है; 16 मिनट के वीडियो में डाइविंग करते हुए दिखे
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राहुल का आरोप- ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का मकसद सुरक्षा नहीं: एक बिजनेसमैन को फायदा पहुंचाना है; 16 मिनट के वीडियो में डाइविंग करते हुए दिखे

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि मोदी सरकार ग्रेट निकोबार आइलैंड प्रोजेक्ट पर झूठ बोल रही है। राहुल ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार और बीजेपी आपसे कहती है कि ‘ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट’ रक्षा से जुड़ा है। असल में ऐसा नहीं है। इस प्रोजेक्ट का मकसद सुरक्षा और ट्रांसशिपमेंट नहीं है, बल्कि एक बिजनेसमैन को फायदा पहुंचाना है। ताकि भारत की सबसे कीमती और अनोखी इकोलॉजिकल जमीन पर होटल और कसीनो बना सके। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर 16 मिनट का एक वीडियो शेयर किया है। जिसमें उन्होंने बताया कि मैं भारत के सबसे दक्षिणी छोर पर गया। मैं इंदिरा पॉइंट पर खड़ा हुआ। मैं उन पेड़ों के नीचे से गुजरा जो सदियों से वहां खड़े हैं। मैंने दुनिया की सबसे शानदार कोरल रीफ (मूंगा चट्टानों) के बीच गोता लगाया। राहुल गांधी पिछले डेढ़ महीने से ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट के सबसे मुखर आलोचकों में से एक हैं। उन्होंने इसे पर्यावरण, आदिवासी अधिकारों और पारदर्शिता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनाया है, जबकि केंद्र सरकार इसे रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से अहम प्रोजेक्ट बता रही है। राहुल ने अप्रैल के अंडमान-निकोबार आइलैंड्स के अपने दौरे से जुड़ा 16 मिनट का एक वीडियो जारी किया है। इसके अलावा उन्होंने लोगों से एक पिटीशन पर साइन करने की अपील की ताकि वे मोदी सरकार को बता सकें कि वे लालच के बजाय हरियाली चुनते हैं। राहुल गांधी के आरोप राहुल गांधी की डीप-सी डाइविंग की तस्वीरें… क्या है ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट भारत सरकार के मुताबिक यह लगभग ₹90,000 करोड़ की बहुउद्देश्यीय परियोजना है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, एयरपोर्ट, बिजली संयंत्र और एक नया टाउनशिप विकसित करने की योजना है। सरकार का तर्क है कि यह भारत की समुद्री सुरक्षा, व्यापार और इंडो-पैसिफिक रणनीति के लिए जरूरी है। सरकार इसे महत्वपूर्ण मानती है क्योंकि ग्रेट निकोबार दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक मलक्का स्ट्रेट में एंट्री एरिया के बेहद करीब है। यह वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण रूट है। भारत का बड़ा हिस्सा कंटेनर ट्रांसशिपमेंट अभी भी विदेशी बंदरगाहों जैसे सिंगापुर, कोलंबो और पोर्ट क्लांग से होकर गुजरता है। सरकार चाहती है कि यह कारोबार भारत में आए।



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