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आपके पति सिर्फ ‘जिंदा लाश’ हैं…’ डॉक्टरों द्वारा कहे गए ये शब्द गहरे, कभी न भरने वाले जख्म से कम नहीं थे। अस्पताल की फाइलों में तो मेरे पति आरोन विलियम्स की स्थिति को ‘बेहद गंभीर’ बताया गया था, पर दिल यह मानने को तैयार नहीं था। क्या किसी जीते-जाते इंसान को इस तरह ‘निष्क्रिय’ बताना सही है? कभी-कभी डॉक्टरों की यह बेरहम भाषा भीतर के दर्द व बेबसी को ज्यादा गहरा कर देती है। सब कुछ अक्टूबर 2024 में एक सफर के दौरान शुरू हुआ था। रास्ते में अचानक आरोन को कार्डियक अरेस्ट आया। डॉक्टरों ने हार नहीं मानी और पांच बार कड़े प्रयासों के बाद आखिरकार उनका दिल फिर से धड़कने लगा। मगर इस पूरी प्रक्रिया में दिमाग को काफी देर तक ऑक्सीजन नहीं मिल सकी, जिससे वे गहरे कोमा में चले गए। डॉक्टरों ने इस मेडिकल कंडीशन को ‘पर्सिस्टेंट वेजिटेटिव स्टेट’ नाम दिया। यह ऐसी अजीब व डरावनी अवस्था होती है जहां मरीज की आंखें तो खुलती हैं, पर इंसान न तो कुछ सोच पाता है और न ही कुछ महसूस कर सकता है। आरोन को टाइप-1 डायबिटीज है। नए शहर में वक्त पर इंसुलिन न मिल पाने की छोटी सी लापरवाही ने उन्हें मौत के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया था। अस्पताल में दर्दनाक 11 दिन बीत जाने के बाद, डॉक्टरों ने मुझसे साफ शब्दों में कहा कि अब मुझे ‘रेत पर एक रेखा’ खींचनी होगी। यानी मुझे ही यह कठिन फैसला करना था कि मैं पति को कब तक लाइफ सपोर्ट सिस्टम और मशीनों के सहारे जीवित रखना चाहती हूं। मेरे सामने दो दर्दनाक विकल्प मौजूद थे। पहला यह कि मैं वेंटिलेटर हटाकर उन्हें हमेशा के लिए शांति से विदा होने देती, या फिर फीडिंग ट्यूब के सहारे अनिश्चितकाल तक उनके साथ इस मुश्किल सफर पर डटी रहती। मैंने हर हाल में ‘जीवन’ को चुना। मुझे लगा कि अगर उम्मीद की एक भी बारीक किरण बची है, तो उन्हें इस तरह मौत के मुंह में धकेलना ‘हत्या’ जैसा ही पाप होगा। महीनों तक आरोन के पास बैठी मैं सिर्फ रोती नहीं रही, बल्कि मैंने खुद को इस न्यूरोलॉजिकल विषय का जानकार बना लिया। मैं इंटरनेट पर दिन-रात तमाम मेडिकल रिसर्च व लेख पढ़ती रहती थी। इसी दौरान मेरी नजर ‘कोवर्ट कॉन्शसनेस’ (गुप्त चेतना) पर हुए शोध पर पड़ी। लेख के मुताबिक, कोमा में दिखने वाले हर चार में से एक मरीज वास्तव में भीतर से पूरी तरह सचेत होता है! उनका दिमाग सक्रिय रहता है, वे हर बात सुनते-समझते हैं, बस उनका लाचार शरीर बाहरी प्रतिक्रिया नहीं दे पाता। विज्ञान की भाषा में इसे ‘कॉग्निटिव मोटर डिसोसिएशन’ कहते हैं, यानी दिमाग व शरीर के बीच का टूटा हुआ तार। उस वैज्ञानिक प्रयोग के दौरान डॉक्टरों ने कोमा के मरीजों को एमआरआई स्कैनर में रखा और उनसे कहा,‘कल्पना कीजिए कि आप टेनिस खेल रहे हैं।’ आश्चर्यजनक रूप से, उन मरीजों के दिमाग का वही हिस्सा तेजी से सक्रिय हुआ जो स्वस्थ इंसान का होता है। यह पढ़कर मैं चौंक गई। मुझे लगा कि शायद मेरा आरोन भी अंदर से सब कुछ सुन रहा है! मैं चीखकर डॉक्टरों से पूछना चाहती थी कि उन्होंने कैसे मान लिया कि वह कुछ महसूस नहीं कर सकता? मैंने हिम्मत नहीं हारी। जब डॉक्टरों ने दोबारा जांच से साफ मना कर दिया, तो मैंने आरोन के साथ बातचीत के वीडियो रिकॉर्ड करने शुरू कर दिए। मैं वीडियो में उनसे कहती,‘मुंह खोलो बेबी…’ आरोन धीरे से मुंह खोल देते। डॉक्टर इसे रिफ्लेक्स कहकर खारिज कर देते, पर मुझे उसमें साफ चेतना दिखती थी। मैं अब उनके एडवांस ब्रेन स्कैन की कोशिशों में जुटी हूं, लेकिन डॉक्टर वीडियो देखने तक से मना कर देते हैं। उनके लिए आरोन केवल एक ‘खत्म हो चुका केस’ थे। इस लड़ाई में मुझे बॉबी शिंडलर का साथ मिला, जिनकी बहन टेरी शियावो का मामला 20 साल पहले दुनिया में गूंजा था। इस दौरान आरोन कई बार अस्पताल व नर्सिंग होम के बीच शिफ्ट हुए, जिससे गलत इलाज, बेडसोर की समस्याएं भी झेलनी पड़ीं। मुझे डर था कि उन्हें दर्द हो रहा है, पर कोई इसे गंभीरता से नहीं ले रहा था। फिर भी, कभी उनका मुंह खोलना, कभी आवाज निकालना, तो कभी नजरें टिकाना… मेरी उम्मीद जिंदा रखता है। मैं बस यही सोचती हूं- मुझे उनसे प्यार है, पर उन्हें कैद में नहीं रखना चाहती। मुझे बस यह जानना है कि वह भीतर हैं या नहीं? मैं अपने पति के लिए लड़ रही हूं। मेरे लिए यह सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि एक जवाब की तलाश है- क्या आरोन कहीं अंदर मौजूद हैं? और शायद यही सवाल आने वाले समय में मेडिकल की दुनिया को नए सिरे से सोचने पर मजबूर करेगा। यह उस धुंधली जगह की दास्तां है जहां विज्ञान अभी पहुंचने की कोशिश कर रहा है और जहां ‘एक पत्नी का प्यार’ मौत को भी इंतजार करने पर मजबूर कर रहा है…।’ अगर वह होश में हैं, तो मैं दुनिया की हर ताकत लगा दूंगी। लेकिन अगर वह वहां नहीं हैं… तो मैं उन्हें जाने दूंगी। विज्ञान के पास अभी जवाब नहीं है, लेकिन मेरी जिद ने उस खामोश कमरे में उम्मीद जगा रखी है। मैं आज भी उनका हाथ थामकर फुसफुसाती हूं- ‘कल्पना करो आरोन, तुम टेनिस खेल रहे हो… मैं यहीं हूं।’ – टैबिता
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