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रात का अंधेरा, गहरी नींद और पलकों के नीचे तेजी से इधर-उधर घूमती पुतलियां। यह दृश्य किसी फिल्म का नहीं, बल्कि आपके दिमाग की उस ‘कार्यशाला’ का है, जहां आपकी दिन भर की जटिल समस्याओं के हल तैयार किए जा रहे हैं। अक्सर हम मुश्किल सवाल पर सिर खपाते हैं, लेकिन अगली सुबह उठते ही उसका जवाब ‘जादू’ की तरह सामने आ जाता है। ‘न्यूरोसाइंस ऑफ कॉन्शियसनेस’ में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, सपने देखना हमारी रचनात्मकता और समस्या सुलझाने की क्षमता को कई गुना बढ़ा देता है। नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता केन पेलर और करेन कोन्कोली ने सपनों पर खास अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि जो लोग अपनी उलझनों के बारे में सपने देखते हैं, वे अगली सुबह उन्हें हल करने में दूसरों से कहीं अधिक सफल रहते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार इसकी दो वजह हैं- गलत रास्ते को भूलना जागते समय हमारा दिमाग अक्सर एक ही तरीके से समस्या को सुलझाने की कोशिश में फंस जाता है। नींद के दौरान दिमाग उन गलत तरीकों को भूलकर नए व सही रास्तों की तलाश करता है। एक साथ कई पहलुओं से विचार जागते समय हम एक बार में एक ही चीज पर ध्यान केंद्रित करते हैं। सपनों में हमारा अचेतन मन एक साथ 10 अलग-अलग दिशाओं में या तरीको से सोच सकता है। सपनों को नियंत्रित कर सकते हैं रिसर्च में ‘ल्यूसिड ड्रीमर्स’ (वे लोग जिन्हें पता होता है कि वे सपना देख रहे हैं) पर भी प्रयोग किए गए। वैज्ञानिकों ने पाया कि ल्यूसिड ड्रीमर्स की तुलना में ‘सामान्य सपने’ देखने वाले लोग पहेलियां सुलझाने में अधिक सफल रहे। इसकी वजह यह है कि ल्यूसिड ड्रीम में भी हम जागने की तरह ही ‘लॉजिकल’ होने की कोशिश करते हैं, जबकि सामान्य सपनों में दिमाग पूरी तरह स्वतंत्र और बेतहाशा रचनात्मक होता है। एमआईटी के प्रोफेसर रॉबर्ट स्टिकगोल्ड कहते हैं, ‘सपनों का प्रभाव सिर्फ जागने के कुछ मिनटों तक नहीं रहता। अगर आपने किसी विषय पर सपना देखा है, तो उसका सकारात्मक और रचनात्मक असर आपके दिमाग पर अगले एक हफ्ते तक रह सकता है। अब सपनों को नियंत्रित करने पर काम हो रहा है।’ जरूरी बात: सपनों का उलझन सुलझाने में उठा सकते हैं फायदा शोधकर्ता के अनुसार, सपनों का उपयोग समाधान के लिए कर सकते हैं- संकेत या चिंतन तकनीक: सोने से ठीक पहले उस समस्या या पहेली के बारे में 5-10 मिनट सोचें, जिसे आप हल करना चाहते हैं। ध्वनि संकेत: शोध के दौरान पहेली सुलझाते समय खास धुन बजाई गई, जिसे सोते समय दोबारा सुनाने पर दिमाग को उसी पहेली का सपना आया। ड्रीम इंजीनियरिंग: भविष्य में ऐसी तकनीक आ सकती है, जिनसे सपनों के साथ ‘संवाद’ कर सकेंगे। 2021 में ऐसा प्रयोग सोते हुए व्यक्ति पर किया गया था।
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