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देर रात तक काम, सफर, तनाव और मोबाइल की आदत से अच्छी नींद लेना मुश्किल हो जाता है। नींद पूरी न हो, तो रोजमर्रा के जीवन पर भी असर पड़ता है। इन दिनों विंटर ओलिंपिक चल रहा है। ऐसे इवेंट्स में भी लगातार ट्रैवल और मुकाबले का दबाव खिलाड़ियों की नींद को प्रभावित करता है। खिलाड़ी अपनी नींद कैसे पूरी करते हैं, इस पर न्यूयॉर्क टाइम्स ने खिलाड़ियों के स्लीप एक्सपर्ट्स से बात की। इन आसान तरीकों को अपनाकर आप भी अपनी नींद बेहतर कर सकते हैं। 1. नई जगह पर सो रहे हैं? आसपास के माहौल को अपने घर जैसा बनाएं बड़े इवेंट्स में तंग कमरे और शोर खिलाड़ियों की नींद खराब करते हैं। ऐसे में खिलाड़ी नॉइस-कैंसलिंग हेडफोन, व्हाइट नॉइज या छोटे ह्यूमिडिफायर साथ रखते हैं ताकि घर जैसा एहसास बना रहे। यूएस ओलिंपिक और पैरालिंपिक कमेटी की साइकोलॉजिस्ट एमिली क्लार्क बताती है कि अच्छी नींद के लिए कमरे में अंधेरा, शांति और थोड़ी ठंडक जरूरी है। 2. सोने से पहले शरीर और दिमाग शांत करने वाला रुटीन बनाएं बिस्तर पर जाते ही दिमाग में दिनभर की बातें घूमने लगती हैं। मनोवैज्ञानिक डॉ. क्लार्क के मुताबिक इसके लिए सोने से 20-30 मिनट पहले रिलेक्स रूटीन बनाएं। गुनगुने पानी से नहाना, हल्का संगीत सुनना या डायरी लिखना मदद कर सकता है। सोने से पहले मोबाइल स्क्रॉल न करें। बॉक्स ब्रीदिंग (4 सेकंड सांस लेना, 4 सेकंड रोकना, 4 सेकंड छोड़ना, 4 सेकंड रुकना) अपनाएं। इससे मन शांत होता है। 3. हर रोज एक ही समय पर उठें यूएस ओलंपिक और पैरालंपिक कमेटी (USOPC) के साइकोलॉजिस्ट जिम डोरली खिलाड़ियों को सोने के समय की बजाय उठने का समय तय रखने की सलाह देती हैं। इससे सर्कैडियन रिदम सही रहती है खासकर अगर सुबह की रोशनी मिल जाए। डॉ. क्लार्क के अनुसार अगर धूप न मिले तो हल्की एक्सरसाइज या सुबह खाना खाना भी बॉडी क्लॉक को रीसेट करने में मदद करता है। भले ही रात को नींद कम हुई हो, सुबह ज्यादा देर तक सोने से बचें। हर दिन एक ही समय पर उठने से शरीर समझ जाता है कि अब दिन शुरू हो गया है, और इससे आपकी नींद धीरे-धीरे ठीक होने लगती है। 4. स्लीप स्कोर उपयोगी, लेकिन इसे लेकर ज्यादा तनाव न लें स्मार्टवॉच और मोबाइल ऐप के जरिए लोग अपनी नींद का स्कोर देखते हैं। यह जानकारी उपयोगी हो सकती है, लेकिन हर सुबह सिर्फ नंबर देखकर चिंता करना सही नहीं है। अगर आप उठने के बाद तरोताजा और ठीक महसूस कर रहे हैं, तो केवल डिवाइस के नबंर पर ही भरोसा न करें। नींद को सिर्फ एक स्कोर से नहीं, बल्कि आपकी ऊर्जा, मूड और दिनभर की सक्रियता से मापे। 5. एक रात नींद न हो तोे घबराएं नहीं, शरीर खुद को ढाल लेता है USOPC की स्लीप गाइडलाइंस कहती हैं कि एथलीट्स के लिए रेगुलर नींद जरूरी है, पर एक रात की खराब नींद परफॉर्मेंस को खराब नहीं करेगी, जब तक पिछली रातों की नींद अच्छी हो। हमारा शरीर मजबूत व फ्लेक्सिबल है। कई दिनों से अच्छी नींद ले रहे हैं, तो एक रात नींद की कमी से ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। डॉ. डोरली बताती हैं कि थके हों तो सोएं और इस बारे में ज्यादा न सोचें। डार्क शावरिंग: कम रोशनी में नहाने का ट्रेंड डार्क शावरिंग यानी सोने से पहले कम रोशनी या पूरी तरह अंधेरे में नहाना। हेल्थलाइन के मुताबिक अंधेरा हमारी बॉडी क्लॉक यानी सर्कैडियन रिद्म को संकेत देता है कि दिन खत्म हो रहा है और अब शरीर को आराम की जरूरत है। कम रोशनी में रहने से मेलाटोनिन हार्मोन का स्राव बढ़ता है, जो नींद लाने और शरीर को रिलेक्स करने में अहम भूमिका निभाता है। यह तरीका तनाव कम करने और दिमाग को शांत करने में भी सहायक हो सकता है। गुनगुने पानी से नहाने पर शरीर का तापमान पहले बढ़ता है और बाहर आने के बाद तेजी से घटता है। तापमान में यह गिरावट दिमाग को संकेत देती है कि अब सोने का समय है, जिससे नींद जल्दी आती है।
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