45 मिनट पहले
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- जिस तरह से हम किसी देश की संस्कृति के अभ्यस्त हो जाते हैं, ठीक वैसा ही कॉर्पोरेट जीवन के साथ भी होता है। समय के साथ हम इस बात को समझ लेते हैं कि हमारी बातचीत और व्यवहार किस प्रकार के होने चाहिए। और हमें क्या तौर-तरीके अपनाने चाहिए। लेकिन जब अचानक कुछ अप्रत्याशित चीजें हमारे सामने आती हैं, तो यह हमें असहज कर सकता है। यहां चार ऐसी रणनीतियां पाठकों के लिए प्रस्तुत की जा रही हैं, जो किसी भी लीडर को नए वातावरण में सहजता से ढलने में मदद कर सकती हैं…
1. अपनी से पहले दूसरों की राय जरूर लें अपना एजेंडा घोषित करने से पहले अगर आपको नए सहकर्मियों और कर्मचारियों से बातचीत करने की जरूरत महसूस हो तो तुरंत एेसा करें। उनसे खुले प्रश्न पूछें। जैसे, अगर आप अपनी नौकरी या हमारे काम करने के तरीके में कुछ बदलाव ला सकते हैं, तो वह क्या हो सकते हैं? इससे आपको चुनौतियाें, विकल्पाें और सहयोगियों को समझने में काफी मदद मिल सकती है।
2. समझें कि बदलाव की भी एक सीमा होती है अक्सर आपको यह कहा जाता है कि पिछली व्यवस्था सही नहीं थी और अब सुधार करना आपका काम है। ऐसे में आप तेजी से फैसले लेने लगते हैं, लोगों को बदलने या नई पहल शुरू करने लगते हैं। लेकिन अगर कभी यह कदम कर्मचारियों या सहकर्मियों को नाराज कर दे, तो वे आपके खिलाफ भी हो सकते हैं। इसलिए कोई भी बदलाव धीरे-धीरे और सोच-समझकर ही लागू करें।
3. एक कल्चरल मेंटर की पहचान अवश्य करें किसी ऐसे व्यक्ति या मार्गदर्शक की तलाश करें, जो आपको नई जगह के अनकहे नियम (इंप्लिसिट कोड्स) समझा सके। वे व्यक्ति आपके हित में काम करेंगे। इस बात का खास ध्यान रखें कि इनके कोई छुपे हुए राजनीतिक मकसद नहीं होने चाहिए। ऐसे मार्गदर्शक आपको हर तरह से बहुत मदद कर सकता है। आप इन्हें अपना कल्चरल मेंटर भी समझ सकते हैं।
4. अपनी छवि या नैरेटिव पर पूरा नियंत्रण रखें अगर आपको लगे कि लोग आपको गलत समझ रहे हैं, तो सांस्कृतिक िभन्नताओं को सामने रखें। जैसे िक आप उनसे यह कह सकते हैं कि अगर मेरी प्रतिक्रिया आपको कठोर लगी हो तो इसके लिए कृपया आप मुझे क्षमा करें। मेरी पिछली कंपनी में यह बोलने का सामान्य तरीका था, लेकिन मैंने यह समझ लिया है कि यहां यह शायद सबसे प्रभावी रणनीति नहीं है।








