अग्निवीर साहिल तोमर बेटे के शव को अंतिम यात्रा के लिए जाता देख मां मनीषा खुद को संभाल नहीं सकीं। कभी वह बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़तीं तो कभी चीख-चीखकर भगवान से अपने बेटे को वापस लौटा देने की गुहार लगातीं। रोते-बिलखते हुए मां कहती कुछ दिन पहले ही साहिल से फोन पर बात हुई थी। उन्होंने बेटे से कहा था कि ट्रेनिंग पूरी होते ही जल्द घर आ जाना।
मां को क्या पता था कि जिस बेटे के घर लौटने का इंतजार था, वह तिरंगे में लिपटकर आएगा। मां की आंखों से आंसुओं की धारा लगातार बहती रही और वह बार-बार कहती रहीं, भगवान मेरे लाल को लौटा दो, मैं उसके बिना कैसे जिऊंगी। वह बार बार रोते हुए कहती बेटा की नौकरी लगने के बाद घर में खुशियों का माहौल था। उसके विवाह के लिए रिश्तेदार और परिचित लगातार रिश्ते लेकर आ रहे थे।








