अधिक मास को पुरुषोत्तम मास क्यों कहते हैं:  इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा, दान-पुण्य, नदी स्नान जैसे 10 शुभ काम करने की है परंपरा
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अधिक मास को पुरुषोत्तम मास क्यों कहते हैं: इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा, दान-पुण्य, नदी स्नान जैसे 10 शुभ काम करने की है परंपरा

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23 घंटे पहले

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आज (17 मई) से ज्येष्ठ पुरुषोत्तम मास शुरू हो गया है। ये महीना 15 जून तक रहेगा, इसके बाद ज्येष्ठ मास का शुक्ल पक्ष शुरू होगा, जो कि 29 जून तक रहेगा। अधिक मास में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ संस्कार जैसे मांगलिक कार्यों के लिए मुहूर्त नहीं रहते हैं। अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। यह महीना भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) को समर्पित है, इसलिए इस महीने में किए गए पुण्य कर्मों का फल कई गुना बढ़कर मिलता है।

अधिक मास को ऐसे मिला भगवान विष्णु का नाम

हिन्दी पंचांग के अतिरिक्त महीने को मलिन माना जाता है, इस वजह से इसका एक नाम मलमास पड़ गया। सभी 12 महीनों के अलग-अलग देवता स्वामी हैं, लेकिन यह अतिरिक्त महीना मलिन होने से कोई भी देवता इसका स्वामी नहीं बनना चाहता था। उस समय मलमास ने विष्णु जी से प्रार्थना की थी। मलमास की प्रार्थना से प्रसन्न होकर विष्णु जी इस महीने के स्वामी बन गए और अपना सर्वश्रेष्ठ नाम पुरुषोत्तम भी इस महीने को दिया। इस कथा की वजह से अधिक मास को पुरुषोत्तम मास कहते हैं।

अब जानिए इस महीने में कौन-कौन से 10 शुभ काम कर सकते हैं…

1. भगवान विष्णु की पूजा और नामस्मरण

इस महीने में रोज विष्णु सहस्रनाम, ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र जप और श्रीहरि की पूजा की जाती है। मान्यता है कि पुरुषोत्तम मास में भगवान विष्णु की पूजा करने से कई जन्मों के पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-शांति आती है।

2. दान-पुण्य करना

अन्न, वस्त्र, धन, जल, छाता, जूते-चप्पल जैसी जरूरत की चीजों का दान इस महीने में खासतौर पर करना चाहिए। शास्त्रों में कहा गया है कि अधिक मास में दिया गया दान कई गुना पुण्य देता है।

3. सत्संग और भागवत कथा सुनना

इस महीने में श्रीमद्भागवत कथा, रामायण पाठ या सत्संग में प्रवचन सुनना बहुत शुभ माना जाता है। इससे नकारात्मक विचार दूर होते हैं, मन शुद्ध होता है और भक्ति भाव बढ़ता है।

4. व्रत और संयम का पालन करना

अधिक मास में सात्विक जीवन जीने की परंपरा है। कई लोग इस महीने में एक समय भोजन करते हैं, व्रत करते हैं। यह महीना आत्म-नियंत्रण करने की सीख देता है।

5. तुलसी पूजन करना

तुलसी को विष्णु प्रिया है, इसलिए विष्णु जी की पूजा में तुलसी की पत्तियां खासतौर पर रखी जाती हैं। अधिक मास में रोज शाम को तुलसी के पास दीपक जलाते हैं। तुलसी के पौधे की सेवा करने से विशेष पुण्य मिलता है।

6. तीर्थ स्नान करना

इस महीने गंगा, यमुना, नर्मदा, शिप्रा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने भक्त पहुंचते हैं। जो लोग नदी स्नान नहीं कर पा रहे हैं, वे घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। ऐसा करने से भी तीर्थ स्नान के समान पुण्य मिलता है।

7. मंत्र जप और ध्यान करना

इस महीने में पूजा-पाठ के साथ ही मंत्र जप, ध्यान करने का विशेष महत्व है। विशेष रूप से विष्णु जी के मंत्रों का जप करने की परंपरा है।

8. पितृ तर्पण और सेवा कार्य करना

पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध जैसे शुभ काम करना चाहिए। जरूरतमंद वृद्धों, गरीबों की सेवा करना पुण्यकारी माना गया है। घर-परिवार के मृत सदस्यों को पितर देव माना जाता है, इनके नाम पर शुभ काम करने की परंपरा है।

9. गौ सेवा करना

गाय को चारा, जल देना और पशु-पक्षियों के प्रति दया भाव रखना इस मास का महत्वपूर्ण कर्म माना जाता है। किसी गौ शाला में गायों की देखभाल के लिए धन का दान भी करना चाहिए।

10. तीर्थ यात्रा करना

इस महीने में भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण, श्रीराम से संबंधित तीर्थ जैसे मथुरा, जगन्नाथ पुरी, द्वारका, बद्रीनाथ, अयोध्या जैसे तीर्थों की यात्रा करने की परंपरा है।

क्रोध और नकारात्मकता से बचें

इस महीने में झूठ, गुस्सा, कटु वचन और हिंसा से दूर रहना चाहिए। सत्य, शांति और संयम का पालन करना चाहिए। इसे ही वास्तविक आध्यात्मिक साधना माना गया है।

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