59 मिनट पहले
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टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने सैटेलाइट नेटवर्क प्रोवाइडर्स के लिए अलग ऑथराइजेशन फ्रेमवर्क का प्रस्ताव दिया है। इसका मकसद इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरिंग बढ़ाना और सैटेलाइट कनेक्टिविटी का विस्तार करना है।
TRAI ने डायरेक्ट-टू-डिवाइस (D2D) सेवाओं को भी इस ढांचे में शामिल करने की सिफारिश की है। इससे मोबाइल डिवाइस सीधे सैटेलाइट से जुड़ सकेंगे।
ये सिफारिशें 5 नवंबर को नई दिल्ली में सामने आईं। भारत में सैटेलाइट स्पेक्ट्रम आवंटन और रेगुलेटरी नियमों को लेकर बहस के बीच TRAI ने यह प्रस्ताव दिया है।
प्रस्ताव के तहत सैटेलाइट नेटवर्क प्रोवाइडर टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स को सैटेलाइट कम्युनिकेशन नेटवर्क ऐज अ सर्विस (SCNaaS) दे सकेंगे। वे सीधे अंतिम ग्राहकों को टेलीकॉम सेवाएं नहीं दे पाएंगे।
अलग ऑथराइजेशन का प्रस्ताव
TRAI ने टेलीकम्युनिकेशंस एक्ट, 2023 के तहत ‘सैटेलाइट कम्युनिकेशन नेटवर्क प्रोवाइडर ऑथराइजेशन’ शुरू करने की सिफारिश की है।
यह ऑथराइजेशन पूरे देश में लागू होगा। इसकी अवधि अधिकतम 20 साल होगी। इसे आगे 20 साल तक की एक और अवधि के लिए रिन्यू किया जा सकेगा।
इस मॉडल में सैटेलाइट नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर और टेलीकॉम सेवाओं को अलग रखने का प्रस्ताव है। इससे टेलीकॉम ऑपरेटर खुद सैटेलाइट नेटवर्क बनाने और चलाने के बजाय कमर्शियल पार्टनरशिप के जरिए इसका इस्तेमाल कर सकेंगे।
प्रस्तावित ढांचे में फिक्स्ड सैटेलाइट सर्विसेज (FSS), मोबाइल सैटेलाइट सर्विसेज (MSS) और डायरेक्ट-टू-डिवाइस कनेक्टिविटी शामिल होगी।
D2D सेवाओं के लिए MSS और इंटरनेशनल मोबाइल टेलीकम्युनिकेशंस (IMT) स्पेक्ट्रम, दोनों के इस्तेमाल की अनुमति देने की सिफारिश की गई है।
D2D कनेक्टिविटी के लिए साझेदारी
D2D कनेक्टिविटी से ऐसे इलाकों में भी संपर्क बढ़ सकता है, जहां पारंपरिक टेरेस्ट्रियल मोबाइल नेटवर्क की पहुंच सीमित है या बिल्कुल नहीं है।
TRAI ने IMT स्पेक्ट्रम रखने वाले टेलीकॉम ऑपरेटरों को अधिकृत सैटेलाइट कम्युनिकेशन नेटवर्क प्रोवाइडर्स के साथ साझेदारी में D2D सेवाएं देने की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा है।
स्पेक्ट्रम आवंटन का प्रस्ताव
स्पेक्ट्रम आवंटन के तहत TRAI ने फीडर लिंक के लिए FSS स्पेक्ट्रम के एडमिनिस्ट्रेटिव असाइनमेंट की सिफारिश की है।
यूजर लिंक के लिए FSS और MSS स्पेक्ट्रम आवंटित किए जा सकेंगे। इसके लिए तय शर्तें लागू होंगी।
स्पेक्ट्रम असाइनमेंट शुरुआत में अधिकतम पांच साल के लिए वैध रहेगा। सरकार बाजार की स्थिति के आधार पर इसे दो साल तक बढ़ा सकेगी।
फीस और स्पेक्ट्रम चार्ज
TRAI ने ऑथराइजेशन फीस के तौर पर एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) का 8% लेने का प्रस्ताव दिया है। इसमें न्यूनतम ऑथराइजेशन फीस नहीं होगी।
सेंट्रल गवर्नमेंट की ओर से आवंटित FSS और MSS स्पेक्ट्रम के लिए सालाना न्यूनतम स्पेक्ट्रम चार्ज 3,500 रुपए प्रति MHz रखने की सिफारिश की गई है।
प्रस्तावित सिफारिशें वर्टिकली इंटीग्रेटेड सैटेलाइट सर्विस प्रोवाइडर्स और साझा नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल पर काम करने वाली कंपनियों के बीच रेगुलेटरी समानता स्थापित करने की कोशिश करती हैं।
सैटेलाइट बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा
भारत का सैटेलाइट कम्युनिकेशंस बाजार अब ज्यादा प्रतिस्पर्धी दौर की ओर बढ़ रहा है। एलन मस्क की अगुआई वाली स्टारलिंक, भारती समर्थित यूटेलसैट वनवेब और रिलायंस जियो का सैटेलाइट कम्युनिकेशंस कारोबार इस बाजार में उतरने की तैयारी में हैं।
सैटेलाइट ब्रॉडबैंड से मौजूदा टेरेस्ट्रियल नेटवर्क को मदद मिलने की उम्मीद है। इससे दूरदराज और कम सेवा वाले इलाकों में कनेक्टिविटी बेहतर हो सकती है।
TRAI ने कहा कि उसकी सिफारिशों का उद्देश्य “भारत में मजबूत और प्रतिस्पर्धी सैटेलाइट कम्युनिकेशन इकोसिस्टम का विकास” करना है।
रेगुलेटर ने कहा कि यह ढांचा SCNaaS के जरिए सैटेलाइट नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर और स्पेक्ट्रम के बेहतर इस्तेमाल में मदद करेगा। इससे D2D कनेक्टिविटी समेत नई सैटेलाइट आधारित सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा।








