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अमिताभ कांत का कॉलम: 2 चीजों पर फोकस जरूरी, निर्यात को बढ़ाना और निवेशकों को बुलाना

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3 घंटे पहले

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अमिताभ कांत नीति आयोग के पूर्व सीईओ और भारत के पूर्व जी-20 शेरपा - Dainik Bhaskar

अमिताभ कांत नीति आयोग के पूर्व सीईओ और भारत के पूर्व जी-20 शेरपा

रुपए की कीमत में गिरावट के दौरान भारत की नीतिगत प्रतिक्रिया अर्थव्यवस्था में मौजूद समस्याओं को दूर करने के बजाय पूंजी के प्रवाह को मैनेज करने पर केंद्रित रही है। लेकिन फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट डिपॉजिट (एफसीएनआर) जैसी योजनाएं महज अस्थायी राहत दे सकती हैं। इनसे भले ही कुछ समय का कैश-फ्लो बन जाए, लेकिन कीमत आरबीआई को चुकानी पड़ेगी। इसका समाधान प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को आकर्षित करना तथा निर्यात बढ़ाना ही है।

वियतनाम और मैक्सिको जैसे देशों ने 2026 में अरबों डॉलर का एफडीआई आकर्षित किया है। भारत को भी विदेशी निवेश बनाए रखना है तो विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका के स्तर पर स्पष्ट नियम और अपेक्षित नतीजे सुनिश्चित करने होंगे। हाल में आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी बेचने की मंजूरी का उदाहरण लें। वित्तीय क्षेत्र में यह हमारा सबसे बड़ा एफडीआई है और इससे बाजार का भरोसा मजबूत हुआ है। इसका श्रेय सरकार के फैसले को है।

सुप्रीम कोर्ट ने यस बैंक, आरबीआई और केंद्र सरकार की अपीलें खारिज करते हुए एटी-1 बॉन्ड को राइट-डाउन (मूल्य शून्य) करने के फैसले को रद्द करने का आदेश बरकरार रखा, क्योंकि बैंक प्रशासक ने री-कंस्ट्रक्शन फ्रैमवर्क के तहत मिले अधिकारों से आगे जाकर फैसला किया था। यह घटनाक्रम कर्ज और इक्विटी में निवेश करने वालों के साथ-साथ पूरे वित्तीय तंत्र के लिए अनिश्चितता पैदा करता है। एसएमबीसी बैंक ने यस बैंक में भारी रकम निवेश की थी। दाइची और एनटीटी डोकोमो के बाद यह तीसरा मामला है, जिसमें जापानी निवेश प्रभावित हुआ।

टाइगर ग्लोबल के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने निवेशकों के मॉरीशस के टैक्स-रेजिडेंसी सर्टिफिकेट के बावजूद संधि के तहत राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि यह सर्टिफिकेट टैक्स से बचने के मामले की जांच को नहीं रोकता है। इस आदेश ने कर-संधियों के मौलिक आधार को ही बदल दिया।

ऐसे ही एयरसेल का रिजॉल्यूशन प्लान उसके कर्जदाताओं और नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) से मंजूर हो चुका था। स्पेक्ट्रम इस्तेमाल करने के अधिकारों को ऑपरेटर कंपनी के खाते में अमूर्त संपत्ति के रूप में मान्यता दी गई थी। फिर भी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्पेक्ट्रम को इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) के तहत होने वाली कार्यवाही का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता। 2025 में भी सुप्रीम कोर्ट ने जेएसडब्ल्यू स्टील द्वारा भूषण पावर एंड स्टील के अधिग्रहण को रद्द कर दिया था, हालांकि अंतत: सितंबर में रिजॉल्यूशन प्लान को बरकरार रखा।

ऐसे फैसलों से एफडीआई और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) पर असर पड़ता है। निवेशक समझते हैं कि सरकार की एक संस्था द्वारा तय की गई स्थिति को दूसरी संस्था बदल सकती है। हम अकसर न्यायिक व्यवस्था में मामलों के लंबे समय तक लंबित रहने की बात करते हैं। लेकिन तथ्य यह भी है कि केंद्र-राज्य सरकारें तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) मिलकर सबसे ज्यादा मुकदमेबाजी करते हैं। देश में विभिन्न कर विवादों में करीब 30 लाख करोड़ रुपए फंसे हुए हैं। हमें समझना होगा कि अनिश्चितता भी एक जोखिम है। यह उस डिस्काउंट रेट ऑफ रिटर्न को बढ़ा देती है, जिसकी अपेक्षा कंपनियां भारत में निवेश का मूल्यांकन करते वक्त करती हैं।

निवेशकों का भरोसा बहाल करने और वांछित एफडीआई को आकर्षित करने के लिए हमें इलेक्ट्रॉनिक्स और डेटा सेंटर क्षेत्र की नई 100 कंपनियों को भारत में मैन्युफैक्चरिंग के लिए आकर्षित करना होगा। एपल को भारत में निवेश के लिए आकर्षित करने और यहां मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग का पूरा इकोसिस्टम बनाने का अनुभव बताता है कि क्या किया जा सकता है। स्मार्टफोन अब भारत की शीर्ष निर्यात श्रेणी बन चुके हैं। हमें डेटा सेंटर के जरूरी कंपोनेंट्स के लिए भी आयात पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। (ये लेखक के अपने विचार हैं)

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